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सावित्री बाई फूले की मनी जयंती

खुटहन। हिन्दुस्तान संवाद। सावित्री बाई फूले की जयंती पर कोकना गांव में मुक्ति दिवस के रूप में मनाया गया जिसमें सैकड़ो महिलाओं ने कैंडिल मार्च निकालकर अत्याचार रोकने के लिए नारेबाजी किया। जुलूस कोकना से चलकर खुटहन तक गया। नेतृत्व सावित्री बाई फूले दलित संघर्ष मोर्चा की प्रदेश प्रभारी ऊषा ने किया। इस मौके पर ऊषा ने कहा कि स्व.फूले जीवन भर दलित महिलाओं को शिक्षित करने के लिए संघर्ष किया। सामन्तवादी लोगों ने हमेशा दलितों की शिक्षा दीक्षा तथा उनके मौलिक अधिकारों का हनन करने का प्रयास किया था।

उनके साथ पशुओं जैसा व्यवहार करके स्कूलों में जाने से रोका जाता था। सावित्री बाई फूले ही वह प्रथम महिला शिक्षिका थीं जिन्होंने सामन्तवादी विचारों का हनन करके 1848 में दलित महिला विद्यालय खुलवाया। उनके बताए मार्गो पर चलकर शिक्षित होकर हम अपना अधिकार प्राप्त कर सकते हैं। इस मौके पर मोतीलाल बहेतू, रीना, विद्या, चन्द्रावती, प्रमिला, प्रेमा, शशिकला, उर्मिला, सीता आदि मौजूद रहीं। ं।

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