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गीली जमीन पर रात बिता रहे साधु संत

इलाहाबाद वरिष्ठ संवाददाता

अधिकारी दावा कर रहे हैं कि माघ मेले की 80 फीसदी से अधिक तैयारी हो गई है। इस दावे में कितनी सच्चाई है, यह त्रविेणी मार्ग के शिविर बयां कर रहे हैं। इन शिविरों में गीली जमीन पर बिजली, पानी व अलाव के बगैर ही साधु-संत किसी तरह रात बिता रहे हैं। त्रविेणी मार्ग के तुलसी चौराहे के आसपास साधु-संतों के एक दर्जन से अधिक शिविर हैं।

मुख्य मार्ग के बगल ही बड़ा सा गड्ढा है। इस गड्डे के बगल दलदल में नैमिषारण्य के स्वामी उपेंद्रानंद का शिविर लगा है। वह एक दर्जन संतों के साथ यहां तीन दिन से हैं। दलदल की वजह से शिविर की जमीन काफी गीली है। पुआल बिछाया गया लेकिन दलदल के कारण काम नहीं आ रहा है। उपेंद्रानंद ने बताया कि शौचालय की सीट खुले में ही लगा दी गई है। इसलिए शौच के लिए मैदान में जाना पड़ रहा है।

पानी व बिजली का कनेक्शन भी नहीं मिला है। इस शिविर के बगल ही लगभग सौ बीघा जमीन दलदल है। इसे जेसीबी लगाकर समतल किया जा रहा है। तुलसी चौराहे के बगल स्वामी विवेकानंद सरस्वती संस्थान का शिविर लग रहा है। वहां भी जमीन का काफी गीली है इसलिए शिविर लगाने में दिक्कत हो रही हैं। शिविर की व्यवस्था में लगे अभिषेक पांडेय ने बताया कि आसपास के दर्जनभर से अधिक शिविरों के लोगों को पानी के लिए आधा किमी दूर सेक्टर कार्यालय जाना पड़ता है।

बगल वाले शिविर के अशोक शुक्ल बताते हैं कि वह अभी गंगाजल पी रहे हैं। पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं है। उन्होंने बताया कि शिविर में नल लगा है लेकिन अभी कनेक्शन नहीं जोड़ा गया है। बिजली का भी कनेक्शन नहीं मिला है। रामानंदाचार्य मार्ग अ पर भी काफी दलदल है। इस मार्ग पर लगे शिविरों में रहने वाले भी अंधेरे में ठिठुरते हुए रात बिता रहे हैं। राघवेंद्र खालसा का शिविर लगाने वाले रामकुमार दास ने बताया कि जमीन गीली है लेकिन मजबूरी है।

गीली जमीन पर पुआल बिछाकर काम चलाया जा रहा है। पानी, बिजली की बात छोडिम्ए अभी तक अलाव तक की व्यवस्था नहीं है। साधु-संत लकड़ी खरीदकर अलाव लगा रहे हैं। सेक्टर चार का नजारा और भी बदतर है। सेक्टर चार के कार्यालय के सामने लगभग 50 बीघा जमीन काफी दलदल है। इस जमीन को समतल करने के लिए लगाए गए ट्रैक्टर भी धंस जा रहे हैं। शनिवार दोपहर एक ट्रैक्टर का पूरा पहिया दलदल में धंस गया था। दूसरे ट्रैक्टर से उसे निकाला गया।

गंगोली शविाला मार्ग की हालत भी बहुत खराब है। इस मार्ग पर बिछाई चकर्ड प्लेटें दलदल की वजह से जमीन में धंस गई हैं।

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