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चार सौ खर्च कर गाड़ी पर लगाई बत्ती

मुजफ्फरनगर। हमारे संवाददाता

हाईकोर्ट की ओर से गाड़ी पर लाल-नीली बत्तियों के साथ ही सायरन के इस्तेमाल के मानक तय किए जाने के बाद भी जिले में अनाधिकृत लाल नीली बत्तियों पर लगाम कसने में परवहिन विभाग पूरी तरह से सफल नहीं हो पाया है। विभाग ने इस अभियान के नाम पर मात्र खानापूर्ति की है। सत्तारूढ़ दलों के नेताओं और अधिकारियों की गाड़ी से लाल और नीली बत्ती उतारने का दम फिलहाल नजर नही आ रहा है।

उच्च न्यायालय द्वारा लाल-नीली बत्ती के दुरुपयोग पर सख्ती से रोक लगाने के निर्देश कई बार जारी हुए। हाल में ही हाईकोर्ट ने बिना संवैधानिक पद के लाल-नीली बत्ती और हूटर के उपयोग पर कड़े आदेश दिए हैं। इसके अनुपालन में जांच अभियान भी चले, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात। सड़क पर वाहन मिले तो सौ रुपये का चालान और फिर बत्ती अर्थात पकडेम् गए तो सौ रुपये का दंड वरना वीआईपी दर्जा। यहीं नहीं, लाल-नीली बत्ती का दुरुपयोग रोकने के लिए कई बार बाजारों में जाचं हुई।

कुछ दुकानदारों को प्रेशन हार्न, लाल नीली बत्ती की अनाधिकृत बिक्री के तथा काली फिल्म बेचने के आरोप में नोटिस जारी हुए, लेकिन कार्रवाई सफिर रही। नतीजतन इनकी बिक्री पर कोई रोकथाम नहीं लग सकी। यह सिलसिला लगातार जारी है। एक तरफ परवहिन विभाग और पुलिस लाल व नीली बत्ती लगे वाहनों की जांच का दावा कर रही है। वहीं दुकानदार खुलेआम प्रतबिंधित नीली-लाल बत्ती की बिक्री कर रहे हैं। टैक्सियों और निजी गाड़ियों पर भी लाल-नीली बत्तीसमय समय पर सरकारी कार्यो में ली जाने वाली टेक्सियों पर भी लाल नीली बत्ती लग गई है।

कई टैक्सी चालक तो स्थायी तौर पर ही लाल बत्ती लगाकर चलते हैं। एआरटीओ देवमणि भारतीय के मुताबिक अक्सर जांच में देखने को मिलता है कि दूसरे जिलों से आने वाले अधिकारी बत्ती लगी टैक्सी में चलते हैं। जबकि वह खुद ही फ्लैशर लाइट लगाने के लिए अधिकृत नहीं है। ऐसा ही सरकारी महकमों वाणिज्य कर विभाग, आयकर विभाग, के अधिकारी अपने निजी वाहनों में नीली बत्ती लगाकर चलते हैं। वहीं कई अधिकारियों ने अपनी निजी गाड़ी पर लाल नीली बत्ती लगा ली है जिसमें वह नही उनके परिजन सफर करते हैं।

माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के बाद जिले में लाल व नीली बत्ती लगे वाहनों से उन्हें हटाने का काम चल रहा है। अभियान चलाकर बत्ती हटाई गई है। आगे भी अभियान जारी रहेगा। देवमणि भारतीय, एआरटीओ प्रवर्तन, मुजफ्फरनगर --हाईकोर्ट का आदेश आने के बाद प्रदेश शासन ने एक समिति बनाई है जो यह तय करेगी कि कौन लाल नीली बत्ती का उपयोग अपनी गाड़ी पर कर सकता है। इस संबंध में आदेश आने के बाद जो अनधिकृत होगा उसकी लाल और नीली बत्ती उतरवा दी जाएगी।

गाड़ियों पर काली फिल्म उतारने के आदेश मिल गए हैं गाड़ियों के शीशों से काली फिल्म उतारने का अभियान जल्द शुरू किया जाएगा। कौशलराज शर्मा जिलाधिकारी मुजफ्फरनगरं।

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