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ठान कर आए थे जान से मारने के लिए

कानपुर। कार्यालय संवाददाता

सपा नेता राजीव मिश्रा उर्फ राजू की हत्या करने वालों ने पहले से ठान रखा था कि उसेजिंदा नहीं छोड़ेंगे। तभी उन्होंने शुक्रवार की दोपहर राजीव को उकसाने के लिए घूरा था। लेकिन समझौते के कारण राजीव ने मुंह फेर लिया था। वारदात की रात कुलदीप सोनकर अपने भाइयों और भांजे के साथ घटना स्थल पर पहुंचा।

उस दौरान राजीव शमीम के घर के बाहर बैठे आग ताप रहे थे। कुलदीप ने राजीव से हाथ मिलाया और उनके गोली मार दी। इतने में साथ आए आरोिपयों ने राजीव पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दी। एक ने शमीम की कनपटी पर भी तमंचा रखकर उसे चुप रहने को कहा था। पोस्टमार्टम के दौरान राजीव के शरीर में चार गोलियां मिली एक सिरे में, दो सीने में, एक नाभी के पास और पांचवी गोली हाथ से आरपार हो गई थी।

एक सप्ताह पहले से चल रही थी हत्या की योजना इलाके में रहने वाले जान िनसार ने बताया कि राजीव से हत्यारोपी कुलदीप, मनजीत, अिमत, भीम सोनकर उनके पिता सागर और भांजा अंकुर काफी समय से रिंजश मान रहे थे। जान िनसार के मुताबिक शुक्रवार की दोपहर दो बजे आरोपी और राजीव उनके घर के पास ही खड़े थे। उन्होंने राजीव को उकसाने के लिए उसे घूरा। जान िनसार ने राजीव को आगाह किया लेकिन राजीव ने समझौते की बात करते हुए मुंह फेर लिया।

छह पर रिपोर्ट दर्ज, लगी थी पांच गोलियांराजीव मिश्रा की गोली मारकर हत्या करने के मामले में पुलिस ने भाई राघवेन्द्र की तहरीर पर शुक्रवार की देर रात छह लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कर ली। शिनवार को राजीव मिश्रा का पोस्टमार्टम किया गया। जिंसमें पांच गोलियां लगने की पुष्टि हुई है। इस दौरान रत्तूपुरवा क्षेत्र के सभी लोग पोस्टमार्टम हाउस में मौजूद थे। सीओ बाबूपुरवा पवित्र मोहन ित्रपाठी ने बताया कि दो तीन लोगों को उठाकर पूछताछ की जा रही है।

राजीव का मूल िनवास था बिल्हौर राजीव मिश्रा मूल रूप से संङोतीपुर बादशाहपुर बिल्हौर के रहने वाले थे। परिवार में भाई गजेन्द्र, विजेन्द्र, संजय और राघवेन्द्र हैं। सन 2004 में मुख्यमंत्री से हुई थी मुलाकात राजीव के भतीजे श्यामलाल मिश्रा ने दावा किया कि सन 2004 में राजीव कन्नौज में छात्र राजनीित करते थे। उस दौरान वह नवाब सिंह के भाई नीलू को अध्यक्ष पद के लिए लड़वा रहे थे। तभी राजीव मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के सम्पर्क में आए। उस दौरान वह मुख्यमंत्री नहीं थे, दोनों में अच्छी दोस्ती हो गई और मुख्यमंत्री बनने के बाद भी राजीव उनके सम्पर्क में बने रहते थे।

 

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