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गजल की शाम विदेशी कलाकारों के नाम

नई दिल्ली, शशि प्रभा तिवारी

लोक कला मंच के वासुकि ऑडिटोरियम में शाम-ए-गजल आयोजित थी। इसे सौरंग संगीत सोसायटी ने आयोजित किया था। शाम-ए-गजल कार्यक्रम में अफगानिस्तान के गजल गायक शाह महमूद नौरोजी और कनाडा के देव बंसराज रामकशिुन ने शिरकत किया। अफगानिस्तान के गजल गायक शाह महमूद नौरोजी मानते हैं कि हिंदुस्तान में संगीत और संस्कार महफूज है। गायक शाह महमूद नौरोजी कहते हैं कि मैंने करीब तीस साल पहले वासिफ देशपांडे से हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत सीखा था। दरअसल, हमारे संगीत का उस्ताद हिंदुस्तान है और हमारे देश के कलाकार हिंदुस्तान के शागिर्द हैं।

हमारे देश में अमन-चैन नहीं होने से फन और फनकार को बहुत नुकसान उठाना पड़ा है। हमारे वतन का संगीत ढाई-तीन सौ साल पुराना है। वहां राग भोपाली, खमाज, भैरवी, जयजयवंती शादी-ब्याह और खुसूसू महफिलों में खूबसूरती से गाया जाता है। इनदिनों काबुल के गायक शाह महमूद नौरोजी सारंगी उस्ताद साबरी खां से गायन सीख रहे हैं। वह गजल सम्राट जगजीत सिंह और पाश्र्व गायक मुकेश के गजल और गीतों के दीवाने हैं और उन्हें बखूबी गाते भी है। उन्होंने गजल के इस कार्यक्रम में राग भैरवी में शेख शाहजी शेराजी के कलाम और राग बिलावल में उस्ताद मोहम्मद हुसैन की रचना को सुरों में पिरोया।

उन्होंने राग मांड में अफगानिस्तान की उर्दू गजल को पेश किया। कनाडा से पधारे गजल गायक देव बंसराज रामकशिन ने भारत में लोकप्रिय गजलों को गाया। उन्होंने अनूप जलोटा का गाया गजल ‘लज्जत-ए-गम बढा दीजिए‘, जगजीत सिंह का गाया गीत ‘होठों से टू लो तुम‘ और हजरत अमीर खुसरो की रचना ‘छाप तिलक सब छीनी रे‘ को अपने अंदाज में गाया। गायक देव बंसराज की आवाज मधुर और सुरीली थी। उन्होंने बहुत सहजता से रचनाओं को सुरों में पिरोया। उनके साथ संगत करने वाले कलाकारों में शामिल थे-नासिर खां, सुहैल युसुफ खां, शरीक मुस्तफा, फैसल युसुफ खां और क्षितिज सिंह।

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