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वकील की पिटाई मानवाधिकार का सीधा उल्लंघन

सासाराम। विधि संवाददाता। सिविल कोर्ट के वकील मुकेश कुमार कुणाल की थाने में पुलिस द्वारा की गयी पिटाई मामले की स्टेट बार काउंसिल की पांच सदस्यीय टीम ने जांच की। टीम ने वकीलों के साथ पीड़ित वकील के परिजनों से बारी-बारी से घटना के बावत जानकारी ली।

टीम में वरीय वकील व बिहार बार काउंसिल के सदस्यों योगेश चंद्र वर्मा, जयप्रकाश सिंह, राजेश्वर प्रसाद सिन्हा, सूरज नारायण प्रसाद सिन्हा, सुदामा राय थे। टीम के सदस्य व पटना हाईकोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेश चंद्र वर्मा ने बताया कि जांच में वकील की पिटाई में पुलिस की कार्यशैली कठघरे में है और प्रथमदृष्टया घटना के लिए पुलिस पूरी तरह दोषी है। वकील की पिटाई न सिर्फ अमानवीय है, बल्कि मानवाधिकार का खुला उल्लंघन भी है। वकील न्यायपालिका के अविभाज्य अंग हैं।

वकील के जख्मों को नजरअंदाज किया गया। उन्होंने बताया कि मुकदमों की सच्चाई चाहे जो कुछ भी हो, लेकिन, वकील के साथ पुलिस का बरताव बेहद गलत रहा है। उन्होंने कहा कि मामले से हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को अवगत कराया जाएगा। साथ ही स्टेट बार काउंसिल की अगली बैठक में जांच रिपोर्ट पेश की जायेगी। ताकि उचित कार्रवाई हो सके और भविष्य में वकीलों के साथ इस तरह की अमानवीय घटना न हो। उन्होंने कहा कि घटना के जिम्मेदार पुलिस के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं की जाती है, तो वे मामले को उपर तक ले जाएंगे।

ताकि वकील के साथ न्याय हो सके। मौके पर स्टेट बार काउंसिल के अध्यक्ष अखौरी मंगलाचरण श्रीवास्तव, जिला विधिज्ञ संघ के अध्यक्ष शेषनाथ सिंह, सचवि अरुण कुमार सिंह, वकील जेएन सिंह आदि थे। इसके पूर्व जांच टीम के सदस्यों के पहुंचने पर वकीलों ने स्वागत किया।

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