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जर्दा व्यवसायी के हत्यारे पुलिस की पकड़ से बाहर

वरीय संवाददाता, पटना। रीतलाल यादव के कई गुर्गे पकड़े गये। पकड़े गये गुर्गो से पुलिस को जर्दा व्यवसायी मनोज चौरिसया के हत्यारों के बारे में कुछ सुराग भी मिले थे। इसके बावजूद अब तक उनके एक भी हत्यारे पुलिस की पकड़ में नहीं आये हैं। मनोज की हत्या करने के बाद अपराधियों ने उनसे दस लाख 30 हजार रुपये भी लूट लिये थे।

घटना 21 दिसंबर को बहिटा ओवरब्रिज पर घटी थी। पिरजनों के बयान पर अज्ञात अपराधियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने पिछले सप्ताह बहिटा इलाके से ही रीतलाल के आधा दर्जन गुर्गो को गिरफ्तार किया था। इसमें कुख्यात मंगरू राय ऊर्फ संतोष,धर्मेन्द्र राय ऊर्फ भोला, संटू राय , मनीष राय, संजय कुमार, आशिष चंद्र ऊर्फ अजीत व रणजीत कुमार है। इन अपराधियों के पास से पुलिस ने हथियार व कारतूस भी बरामद किये थे। पुलिस को शक था कि मनोज के हत्या व लूट में इन अपराधियों का हाथ हो सकता है।

हालांकि पूछताछ में इन अपराधियों के पास से न तो हत्या में इस्तेमाल किये गये हिथयार मिले और न ही लूट की रकम की बरामद हो सकी। पुख्ता सबूत नहीं मिलने से पुलिस इन अपराधियों के खिलाफ आर्म्स एक्ट का मामला दर्ज कर जेल भेज दिया।

इन्हीं अपराधियों के निशानदेही पर पुलिस ने बहिटा, नौबतपुर व आरा में भी कई जगह छापेमारी की। आरा से भी कई संदिग्ध लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गयी लेकिन कोई अहम सुराग पुलिस के हाथ नहीं लगे।

नौबतपुर के भी कई कुख्यात भूमिगत हो गये हैं। सूत्रों का कहना है कि घटना के बाद अपराधियों ने लूट की रकम आपस में बांट ली। उसके बाद बिहार छोड़ कर बाहर भाग गये। इसी कारण पुलिस के हाथ नहीं लग सके।

पुलिस की अब तक की छानबीन में यही पता चला है कि मनोज की हत्या अपराधियों ने लूटपाट के इरादे से ही की। लूटपाट के विरोध करने पर ही अपराधियों ने उनकी हत्या कर दी। घटना के समय मनोज काले रंग की बैग में रुपये लेकर बैंक में जमा करने जा रहे थे।

लुटेरों तक इसकी खबर पहुंचाने में यानी लाइनर का काम करने में उनके ही किसी नजदीकी का हाथ होने का शक है।

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