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खनन पदाधिकारी के खाते में 27 लाख और मिले

पटना। हिन्दुस्तान ब्यूरो। शेखपुरा के खनिज विकास पदाधिकारी झकारी राम की काली कमाई का खुलासा अभी जारी है। छापेमारी में मिले बैंक खातों की छानबीन के दौरान 27 लाख रुपए और जमा होने की जानकारी ईओयू को मिली है। यह रकम पटना के आशियाना नगर स्थित बैंक की शाखा में खुद और परिजनों के नाम पर खोले गए खातों में जमा है। उधर, खनन इंस्पेक्टर वीरेन्द्र यादव ने जमीन की खरीद में कम कीमत दिखाकर काली कमाई को खपाने का भी प्रयास किया।

ईओयू के अधिकारियों के मुताबिक शुक्रवार को झकारी राम के ठिकानों की तलाशी में कुल 42 बैंक खातों का पता चला है। इनमें कुछ मुख्य खातें है जबकि बाकी रेकरिंग डिपोजिट आदि के हैं। अकेले आशियाना नगर के स्टेट बैंक में उनके और परिजनों के नाम पर खोले गए खातों में 27 लाख 29 हजार 956 रुपए जमा है। अभी उनके 13 बैंक खातों को खंगालना बाकी है। झकारी राम के सभी बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया है।

ईओयू को उनके बैंक खातों में अबतक 2.73 करोड़ रुपए से ज्यादा जमा होने की जानकारी मिली है। सोमवार को बचे खातों के संबंध में छानबीन होगी। वहीं छापेमारी में मिले जमीन के दस्तावेजों की पड़ताल जारी है। जांच से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक बनारस के सिरगोवर्धन में खरीदे गए 58 सौ वर्ग फीट के प्लॉट से संबंधित कुछ और कागजात मिले हैं। जिससे पता चलता है कि उक्त जमीन के लिए झकारी राम द्वारा 60 लाख का भुगतान किया गया।

वीरेन्द्र यादव के लिए घट गई जमीन की कीमत माइनिंग इस्पेक्टर वीरेन्द्र प्रसाद यादव ने जब पत्नी के नाम पर अपने गांव के पास जमीन खरीदी तो उसकी कीमत पहले के मुकाबले कम हो गई। ईओयू के मुताबिक वर्ष 2009 में उक्त जमीन को किसी और शख्स ने खरीदा था। उस वक्त उसकी कीमत रजिस्ट्री में करीब 15 लाख थी। लेकिन वहीं जमीन जब वीरेन्द्र यादव ने चिमनी भट्ठा लगाने के लिए पिछले वर्ष पत्नी के नाम पर खरीदी तो वह घटकर 11 लाख 11 हजार की हो गई।

कागजातों की छानबीन में ईओयू को ढेरों ऐसी चौंकाने वाली जानकारियां मिली हैं। जिस जमीन की कीमत रजिस्ट्री में महज 11 लाख थी उसे वास्तव में कई गुना ज्यादा रकम देकर खरीदा गया।

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  • Web Title:खनन पदाधिकारी के खाते में 27 लाख और मिले