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कृषि स्नातकों के दिन बहुरंगे

बेकार बैठे राज्य के कृषि स्नातकों के दिन बहुरने वाले हैं। अन्य कई योजनाओं में कृषि स्नातकों की बहाली पर हो रही चर्चा को अगर छोड़ भी दें तो सिर्फ राष्ट्रीय कृषि विकास योजना और माइक्रो मैनेजमेंट के तहत साढ़े चार हाार विषय वस्तु विशेषज्ञों (एसएमएस) की बहाली होगी। केन्द्र सरकार ने इसके लिए राज्य सरकार से प्रस्ताव मांगा है। विकास आयुक्त की अध्यक्षता में एक जुलाई को राष्ट्रीय कृषि विकास योजना की राज्यस्तरीय समिति की होने वाली बैठक में केन्द्र के इस प्रस्ताव पर संभवत: चर्चा होगी।ड्ढr ड्ढr भारत सरकार के संयुक्त सचिव (प्रसार) आर के तिवारी के पत्र के अनुसार हर दस गांव पर एक एसएमएस की बहाली होनी है। राज्य में लगभग 45 हाार गांव हैं। लिहाजा साढ़े चार हाार एसएमएस की आवश्यकता होगी। बहाली में कृषि स्नातकों को प्राथमिकता देनी है। इन कृषि स्नातकों की बहाली संविदा के आधार पर की जायेगी। मानदेय के रूप में उन्हें पांच हाार रुपये प्रति माह दिये जायेंगे। इसके अलावा ऑपरशनल सपोर्ट के रूप में मोबाइल और पेट्रोल आदि पर खर्च के लिए प्रतिमाह 3500 रुपये दिये जायेंगे। इसके लिए पूरी राशि केन्द्र सरकार देगी। बहाली में गृह प्रखंड के युवकों को प्राथमिकता दी जायेगी। अगर गृह प्रखंड में कृषि स्नातक नहीं मिलेंगे तो सबसे निकट के प्रखंड वाले आवेदक पर विचार किया जायेगा। इन विषय वस्तु विशेषज्ञों के जिम्मे कृषि योजनाओं के प्रसार की जिम्मेवारी होगी। गांवों में चलने वाली कृषि विभाग की योजनाओं को ये सपोर्ट करंगे।ड्ढr ड्ढr इसके अलावे किसानों को नवीनतम तकनीकी से भी अवगत कराएंगे। अपने इलाके में प्रस्तावित सभी ट्रेनिंगों के लिए भी ये उत्तरदायी होंगे। पूर्व में भी केन्द्र ने गांव स्तर पर किसान मित्र बहाल करने का सुझाव राज्य सरकार को दिया है। लेकिन इसके लिए पैसा केन्द्र नहीं देगा बल्कि राज्य सरकार को ही अनके मानदेय आदि पर होने वाले खर्च को वहन करना पड़ेगा।

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