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नियोजन रद्द होने पर भी नौकरी करते रहे कई

मुजफ्फरपुर। अनामिका, कार्यालय संवाददाता। नियोजन रद्द होने के बाद भी दर्जन भर से अधिक शिक्षक नौकरी करते रहे। यही नहीं सारे नियम-कानून को ठेंगा दिखाते हुए दो साल तक ये शिक्षक वेतन भी उठाते रहे।

ताज्जुब यह कि विभाग के नाक के नीचे चल रहे इस खेल की दो साल तक अधिकारियों को भनक तक नहीं लगी। नियोजन इकाई की मिलीभगत से जारी इस फर्जीवाड़े की पोल खुली तो अधिकारियों के साथ ही पूरे विभाग में हड़कंप मच गया है।

फर्जी डिग्री के कारण इन शिक्षकों का नियोजन दो साल पहले ही रद्द कर दिया गया था। इसके बावजूद साहेबगंज, पारू, मड़वन के दर्जन भर से अधिक शिक्षक नौकरी करते रहे। जांच के बाद 2011 में ही इन शिक्षकों के नियोजन को रद्द करने का आदेश दिया गया था।

दो साल बाद जब जनता दरबार में ग्रामीणों की शिकायत आयी तो पता चला कि अब तक इन शिक्षकों को हटाया ही नहीं गया। संबिंधत िनयोजन इकाई से जब पूछा गया तो जवाब आया कि उक्त शिक्षकों को हटाने का आदेश दे दिया गया था। इस बीच बीईओ से लेकर नियोजन इकाई तक एक-दूसरे पर जांच की जिंम्मेदारी फेंक अपना अपना पल्ला झाड़ते रहे। अब जब प्राथिमक शिक्षा निदेशक ने जवाब तलब किया है तो विभाग में फिर से हड़कंप मचा हुआ है।

इधर, विभागीय जानकारों ने आशंका जताई है कि ऐसी गड़बड़ी करने वाले शिक्षकों की संख्या दर्जनों में हो सकती है। इन शिक्षकों को हटाने का था आदेश : अरुण साह, वीणा कुमारी, अनिता कुमारी, अरविन्द, रागिनी, नीलम कुमारी, आनंद कुमार, विनोद कुमार, तारकेश्वर प्रसाद, लिलत कुमार, शशिभूषण, पंकज कुमार, ओमप्रकाश, तारकनाथ सिंह

अब खंगाली जा रही फाइल, की जा रही जांच: डीपीओ स्थापना अब्दुससलाम अंसारी ने बताया किजिंन शिक्षकों को हटाया गया था, उनका नियोजन फर्जी प्रमाण पत्र पर था। नियोजन इकाई को इस संबंध में आदेश दिया गया था।

अब तक वे शिक्षक कैसे काम करते रहे, इसकी जांच की जा रही है। इसके साथ ही रविन्द्र विश्वविद्यापीठ, अमरावती विद्यालय, डायट असम जैसे संस्थान के फर्जी प्रमाण पत्र पर बहाली के भी कुछ मामले आए हैं। सबके प्रमाण पत्रों की जांच की जा रही है।

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