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मेरी गेंदें बल्लेबाजों को चौकाएंगी

जब इस नए खिलाड़ी को मैंने नव-वर्ष की शुभकामना और टीम में चयन की बधाई दी, तो उन्होंने विनम्र भाव से कहा, धन्यवाद भैया। यह देखना दिलचस्प होगा कि रीवा का यह गेंदबाज बतौर न्यूकमर टीम इंडिया की उम्मीदों पर कितना खरा उतरता है। वैसे छह-सात साल के अपने छोटे-से करियर में ईश्वर चंद पांडेय रणजी में और दक्षिण अफ्रीका ‘ए’ दौरे पर शानदार प्रदर्शन कर चुके हैं। अब वह न्यूजीलैंड दौरे पर जा रहे हैं। दौरे से पहले ईश्वर से बातचीत की प्रवीण प्रभाकर ने-

नया साल आपके लिए नई खुशखबरी लेकर आया?
देश के लिए खेलना गर्व की बात है। आने वाला हर दिन मुझे कुछ नया सिखाए, यही उम्मीद है। मैं अपने में सुधार लाता रहूंगा। मेरे लिए चुनौती यही होगी कि खुद को सुधारता रहूं और टीम की उम्मीदों पर खरा उतरूं।

न्यूजीलैंड की पिचें आपको परेशान भी कर सकती हैं?
अभी मैं इंडिया ‘ए’ की तरफ से दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर गया था। न्यूजीलैंड की पिचों की कंडीशन काफी हद तक दक्षिण अफ्रीकी पिचों से मिलती-जुलती है। समुद्र से तेज हवाओं का आना, बाऊंसिंग पिच, सीम मूवमेंट, बल्लेबाजों को कंडीशन समझने में वक्त लगना, एक छोर पर पेस अलग और दूसरी पर अलग, यह सब तो है ही। वैसे भी यह सब एक गेंदबाज के लिए अच्छा ही होता है। जहां तक रहा गेंद पर नियंत्रण का सवाल, तो दक्षिण अफ्रीका में मैंने खुद को साबित किया है। हम तो ऐसी पिचों पर खेल चुके हैं, जहां बाऊंस की कमी है, सीम मूवमेंट नहीं है और स्लो विकेट हैं।

इस बार आप क्या अलग करेंगे?
कुछ नया करने की जगह मैं अपनी बॉलिंग स्टाइल पर ही ध्यान दूंगा, विविधता भरी गेंदें डालूंगा, लाइन-लेंथ और पेस का खयाल रखूंगा, क्योंकि जो मेरी बॉलिंग की खासियत है, वही राज है और बल्लेबाज उससे चौकेंगे।

कहा जाता है कि देश की बेजान पिचों पर तेज गेंदबाजों का करियर छोटा हो जाता है। आप इनसे कैसे उबरेंगे?
खुद को जितना फिट रखूंगा, ज्यादा दिनों तक खेलूंगा। लगातार तेज गेंदबाजी और अधिक से अधिक विकेट झटकने के लिए मुझे अपनी फिटनेस और टेंपरामेंट पर ध्यान देना होगा। अगर ये दोनों ठीक रहे, तो मैं अपना करियर लंबा खीच लूंगा।

आप किसे अपना रोल मॉडल मानते हैं?
ग्लेन मैक्ग्रा को। वह पेस से अधिक विकेट-टु-विकेट एक्यूरेसी और तेज सीम मूवमेंट पर ध्यान देते थे। उनकी गेंदों में स्वाभाविक रफ्तार होती थी। वह किफायती बॉलर थे। उनका हाई आर्म एक्शन उन्हें अधिक बाऊंस दिलाता था, एकदम से बल्लेबाज चौंक जाते थे। एलेन डोनाल्ड सर का भी मैं प्रशंसक हूं। जब वह पुणे वॉरियर्स के कोच थे, तो नेट प्रैक्टिस के दौरान उन्होंने मुझे काफी कुछ सिखाया। सचिन पाजी को याद किए बिना मैं अपनी बात खत्म नहीं कर सकता। ईरानी ट्रॉफी में उनके खिलाफ गेंद फेंकने का मुझे मौका मिला। ऑस्ट्रेलिया दौरे से पहले टीम के अभ्यास सत्र में भी मैंने उन्हें कुछ गेंदें डाली थीं। उनके खेल का मैं जबर्दस्त मुरीद हूं।

लेकिन मैक्ग्रा स्लेजिंग में भी माहिर थे?
नेचर ऑफ एग्रेसन हर गेंदबाज का अलग-अलग होता है। बल्लेबाज को गेंद से जवाब मिले और गेंदबाज को बल्ले से, यही क्रिकेट को खूबसूरत बनाता है। मैं बल्लेबाजों को अपनी गेंद से जवाब दूंगा। अगर आपका इशारा घूरने और बल्लेबाज से नजर मिलाकर गेंद फेंकने का है, तो यह इस पर भी निर्भर करेगा कि सामने कौन-सा बल्लेबाज है।

आप नेचुरल बैट्समैन भी माने जाते हैं। क्या ऑलराउंडर बनना चाहेंगे?
मुझे बेटिंग करना हमेशा से पसंद रहा है। चाहे वह टेनिस बॉल क्रिकेट हो या लेदर बॉल। लेकिन फिलहाल गेंदबाजी पर ही ध्यान दूंगा। जब टीम को बल्ले से जरूरत होगी, बल्लेबाजी करूंगा।

वैसे लेदर बॉल से खेलना कब शुरू हुआ?
मिडिल क्लास घरों में खेलने की नहीं, पढ़ने की बात होती है। शुरू में मैं भी क्रिकेट को लेकर सीरियस नहीं था, बस शौकिया तौर पर टेनिस बॉल से खेल लेता था। बोर्ड परीक्षा के बाद मैं छुट्टियां मना रहा था। एक दिन पता चला कि किसी क्रिकेट टीम के लिए सेलेक्शन हो रहा है। वक्त तो था ही, हम दोस्तों के साथ वहां गए। नेट पर मैंने कुछ गेंदें फेंकीं और मेरा सेलेक्शन हो गया। बाद में पता चला कि मध्य प्रदेश के जिला टूर्नामेंट के लिए मेरा सेलेक्शन हुआ है और मैं रीवा से खेल रहा हूं। इस तरह लेदर बॉल से खेल शुरू हुआ।

अब घरवाले क्या कहते हैं?
घरवालों ने हमेशा मेरा विरोध नहीं किया। शुरू में पापा खेलने से मना करते थे। लेकिन मेरे यूनिवर्सिटी कोच ने उन्हें समझाया, तो उन्होंने मुझे कुछ वक्त की मोहलत दी। फिर अंडर-19 में मेरा प्रदर्शन काफी अच्छा रहा। इसके बाद तो सब कुछ आसान होता गया। आज हम सब बेहद खुश हैं।

क्रिकेट का कौन-सा फॉर्मेट आपको पसंद है?
जिस भी फॉर्मेट में मुझे खेलने का मौका मिलेगा, मैं तेज गेंदें डालूंगा और ज्यादा से ज्यादा विकेट हासिल करना चाहूंगा। एक गेंदबाज को टी-20 में चार ओवर मिलते हैं। कभी-कभी अच्छी गेंदों पर भी पिटाई होती है। इस हिसाब से टेस्ट क्रिकेट में गेंदबाजों को ज्यादा मौके मिलते हैं। वनडे आपको एक्यूरेट व किफायदी गेंदबाज बनाता है। वहीं आईपीएल में आपको कई तरह के खिलाड़ियों के साथ खेलने का मौका मिलता है। सबका अपना महत्व है।

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