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गरीबों से बाबुओं ने वसूली नौ अरब की रिश्वत

हालात के शिकार गरीब परिवारों को पिछले एक साल में अपनी मूलभूत एवं जरूरी सेवाओं को प्राप्त करने के लिए विभिन्न महकमों में तैनात सरकारी बाबुओं को 000 करोड़ रुपये की घूस देनी पड़ी। ट्रांसपरेंसी इंटरनेशनल (इंडिया) और सेंटर फॉर मीडिया स्टडीज (सीएमसी) द्वारा देश के सभी 31 रायों और संघ शासित क्षेत्रों में गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले परिवारों के बीच अध्ययन से इन तथ्यों का खुलासा हुआ है। पुलिस महकमा भ्रष्टाचार में सबसे उपर है। 22,72परिवारों के बीच कराये गए अध्ययन के अनुसार 5.6 करोड़ लोगों को पुलिसिया लफड़े का सामना करना पड़ा। टीआईआई -सीएमएस की रिपोर्ट शनिवार को उप राष्ट्रपति एम. हामिद अंसारी ने जारी की। टीआईआई (इंडिया) के अध्यक्ष एडमिरल आर.एच. तहलियानी ने अध्ययन का खुलासा करते कहा कि गरीबों को साल में सौ दिन का रोजगार उपलब्ध कराने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम जसी योजनाओं के लिए भी गरीबों को घूस देनी पड़ रही है। उपाध्यक्ष डा.एस.के. अग्रवाल का कहना था कि भ्रष्टाचार के दलदल में फंसा गरीब व्यक्ित अपने आप को असहाय महसूस कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार राशन कार्ड प्राप्त करने के लिए 53.60 लाख गरीब परिवारों घूस का रास्ता अपनाना पड़ा। अस्पतालों में बिस्तर, ओपीडी कार्ड बनवाने और ब्लड टेस्ट कराने आदि के लिए 87 करोड़ रुपये की रिश्वत देनी पड़ी। बिजली कनेक्शन, मीटर लगाने, स्कूलों में दाखिला, प्रमाण-पत्र आदि के लिए कर्मचारियों को 1.20 करोड़ रिश्वत देनी पड़ी।

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