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दलाली के चक्कर में नहीं मिलती सरकारी दवा?

चिकित्सा विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस बात की पड़ताल शुरू कर दी है कि पिछले कुछ माह के अंदर सरिकल आँकोलाॉी विभाग को कितनी दवाओं की आपूर्ति की गई। इस विभाग में शुक्रवार को एक मरीा से दलाल केोरिए दवा खरीदवाने का मामला सामने आया था। अब प्रशासन इस बात कीोाँच कर रहा है कि क्या मरीा से उन दवाओं को भी मँगवाया गयाोो स्टोर में थी। इसके साथ ही वार्डो में अब प्रशासन आकस्मिकोाँच कर मरीाों से मँगाईोाने वाली दवाओं की सूची देखेगा। इसका मिलान वार्ड में ोीोा रहीं दवाओं से कियाोाएगा। प्रशासन को सूचना मिली है कि दलाली के चक्कर में मरीाों को सरकारी दवा नहीं दीोाती।ड्ढr दरअसल चिविवि प्रशासन ने पिछले कुछ समय से लाखों रुपए की दवाएँ वार्डो में मरीाों के लिए भिावाई हैं। इसके बावाूद आए दिन यह शिकायत मिल रही है कि वार्ड में भर्ती मरीाों को दवाएँ नहीं मिल रहीं। शुक्रवार को सरिकल आँकोलाॉी विभाग में एक महिला मरीा से करीब छह हाार रुपए की दवाएँ मँगाई।ोूनियर डॉक्टर ने दवा एक दलाल के माध्यम से मँगाई गईं ऐसा न करने पर ऑपरशन न किएोाने की धमकी दे डाली। चिविवि के अधीक्षक डॉ.ोीके सिंह का कहना है कि मामले कीोाँच शुरू कर दी गई है। यह देखाोा रहा है कि पिछले कुछ माह में कितनी दवाएँ विभाग में ोी गईं। प्रशासन के समक्ष अब सबसे बड़ी चुनौती वार्ड में भर्ती मरीाों तक दवा पहुँचाना है। कुछ माह के अंदर प्रशासन ने करीब-करीब हर वार्ड में आवश्यक दवाओं की आपूर्ति की है। इसके बावाूद दवाएँ मरीाों को नहीं मिल रहीं। तो फिर दवाएँोा कहाँ रही हैं? खुद प्रशासन का मानना है कि दवाएँोारी होने के बाद गायब होोाती हैं। इसी वाह से पिछले दिनों मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरके टण्डन ने सभी विभागाध्यक्षों को पत्र ोकर हर वार्ड का प्रभारी किसी न किसी डॉक्टर को बनाएोाने को कहा था। लेकिन इस पर अमल नहीं हुआ। ऐसे में अब प्रशासन एक दल बनाकर वार्डो में भर्ती मरीाों से इस बात की पड़ताल करगा कि उसे कितनी दवाएँ अस्पताल से मिली और कौन सी बार से मँगाई गई।ं

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