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सोनिया बोलीं, हो जाओ चुनाव के लिए तैयार

ांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पार्टी को चुनाव के लिए तैयार रहने का निर्देश दे दिया है। चुनावी रणनीति तैयार करने के लिए अगले माह के अंत में पार्टी का चिंतन शिविर भी आयोजित होगा। इससे समय से पहले लोकसभा चुनाव होने की अटकलें तेा हो गई हैं। इस बीच, कांग्रेस ने वाम दलों पर तीखा प्रहार करते हुए कहा है कि एटमी करार पर वामपंथियों का नारिया तर्कहीन और असंगत है।ड्ढr 10,ोनपथ पर हुई बैठक में सोनिया ने पार्टी के महासचिवों और रायों के प्रभारियों से कहा कि पाँच रायों में होने वाले विधानसभा चुनाव के साथ-साथ लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुट जाएँ। उन्होंने सहयोगियों को चुनाव से संबंधित समितियाँ बनाने, घोषणापत्र तैयार करने, उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया शुरू करने और प्रचार अभियान तैयार करने में जुटने के लिए कहा है।ड्ढr वामदलों के कड़े विरोध के बावजूद सरकार के परमाणु करार पर आगे बढ़ने की मंशा को देखते हुए आम चुनाव समय से पहले होने की संभावनाएँ बढ़ गई हैं। यह पूछने पर कि क्या कांग्रेस की तैयारियों को लोकसभा चुनाव समय से पहले होने का संकेत माना जाए, पार्टी के महासचिव जर्नादन द्विवेदी ने कहा कि आम चुनाव में सात-आठ महीने बचे हैं। ऐसे में पार्टी अभी तैयारी नहीं करेगी तो कब करेगी। मौजूदा सरकार के कार्यकाल का यह अंतिम वर्ष है। अंतिम वर्ष में सभी पार्टियाँ चुनाव की तैयारी करने लगती हैं। श्री द्विवेदी व मीडिया विभाग के प्रमुख वीरप्पा मोइली ने बताया कि इसमें महासचिवों और राय के प्रभारियों ने अपनी-अपनी रिपोर्ट दी। दिग्विजय सिंह और आरके धवन व मार्गरेट अल्वा के अलावा सभी महासचिव उपस्थित थे। पार्टी महासचिव राहुल गांधी भी बैठक में थे। विधानसभा और लोकसभा चुनाव की रणनीति के संबंध में एंटनी समिति की रिपोर्ट पर भी बैठक में चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि समिति ने विधानसभा और लोकसभा चुनाव के लिए समय से काफी पहले उम्मीदवार घोषित करने की सिफारिश की है, जिस पर पार्टी लगभग सहमत है। श्रीमती गांधी ने रायों के मुख्यमंत्रियों से अलग-अलग बात की है और दो दिन पहले उन्होंने दिल्ली कांग्रेस समन्वय समिति की बैठक भी बुलाई थी। मोइली ने कहा कि भारत-अमेरिका परमाणु करार पर वामपंथियों का तर्क निराधार है। माकपा के मुखपत्र में प्रकाश करात के लेख पर सवालिया निशान लगाते हुए कांग्रेस ने यह भी पूछा है कि वह क्यों देश को केवल दस हाार मेगावाट बिाली तक ही सीमित रखना चाहती है,ोबकि एटमी करार के बाद भारत एक लाख मेगावाट बिाली भी पैदा कर सकता है।

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