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इसरो ने शुरू की जीएसएलवी-डी 5 के प्रक्षेपण की तैयारी

इसरो ने शुरू की जीएसएलवी-डी 5 के प्रक्षेपण की तैयारी

23वें भूस्थैतिक संचार उपग्रह जीसेट-14 को ले जाने वाले यान जीएसएलवी-डी 5 को कल श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केन्द्र से प्रक्षेपित करने की तैयारी आज से शुरू कर दी गई।
    
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के एक प्रवक्ता ने आज यहां बताया कि यान को छोड़ने की औपचारिक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं और इसके लिए उल्टी गिनती 11 बजकर 18 मिनट पर शुरू की गई। जीएसएलवी-डी 5 में स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन लगा है और इसे सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से रविवार को शाम चार बजकर 16 मिनट पर द्वितीय प्रक्षेपण स्थल से छोडा जाएगा। 
      
प्रवक्ता ने बताया कि मिशन तैयारी समीक्षा और प्रक्षेपण प्राधिकृत बोर्ड ने 28 दिसंबर को यान को प्रक्षेपित करने की मंजूरी दे दी थी और उसी दिन यान को प्रक्षेपण स्थल पहुंचा दिया गया था। उन्होंने कहा कि यान के प्रक्षेपण के लिए उल्टी गिनती लगभग 29 घंटे तक चलेगी।
    
लगभग दो टन (1982 किलोग्राम) वजन का जीसेट-14 उपग्रह 49.13 मीटर लंबे और तीन चरणों वाले यान के जरिए अंतरिक्ष में जाएगा। यान के प्रथम चरण में ठोस ईंधन, दूसरे में तरल ईंधन और तीसरे में क्रायोजेनिक अपर स्टेज का इस्तेमाल होगा।

प्रवक्ता ने बताया कि उल्टी गिनती के दौरान ही यान के दो चरणों के लिए ईंधन भरा जाएगा और सभी आवश्यक जांच फिर से की जाएगी। इस उपग्रह को प्रक्षेपण पिछले वर्ष 19 अगस्त को किया जाना था, लेकिन प्रक्षेपण से महज दो घंटे पहले इसकी ईंधन प्रणाली में खराबी का पता चला था। इसके बाद मिशन को टाल दिया गया था। 
    
सूत्रों ने बताया कि जीसेट-14 की कार्य अवधि 12 वर्ष की होगी। प्रक्षेपण के बाद यह उपग्रह भारत के नौ भूस्थैतिक उपग्रहों में शामिल हो जाएगा। जीसेट-14 से सी और केयू बैंड ट्रांसपोंडरों की क्षमता बढ़ जाएगी।   

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