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यातायात समस्या का समाधान है बीआरटी गलियारा

दिल्ली की बस रैपिड ट्रांजिट (बीआरटी) के विस्तार से यातायात संबंधी परेशानियों का हल निकाला जा सकता है और सड़क दुर्घटनाओं में कमी की जा सकती है। यह बात भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) के प्राध्यापक और परिवहन विशेषज्ञ दिनेश मोहन ने कही।

दिल्ली की इस व्यवस्था की काफी आलोचना की गई है और करीब-करीब सभी राजनीतिक पार्टियां इसे हटाए जाने पर एकमत हैं।

इंडियन इंटरनेशनल सेंटर में शुक्रवार शाम एक्सिडेंट्स, माइथोलोजीज एंड साइंस आफ ट्रैफिक सेफ्टी चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि दक्षिण दिल्ली में 5.7 किलोमीटर लंबा बीआरटी गलियारा अहमदाबाद से बेहतर है और इसे नहीं हटाया जाना चाहिए।

मोहन ने बताया, ''अगर दिल्ली मेट्रो कुछ किलोमीटर तक चलाया जाता, तो क्या यह सफल होता? परिवहन को बांटने के लिए बीआरटी का विस्तार किए जाने की जरूरत है और तब लोग इसकी कीमत समझेंगे।''

आईआईटी दिल्ली के वाल्वो चेयर प्रोफेसर एमेरिट्स ने कहा, ''डिजायन में कोई समस्या नहीं है, हालांकि यह तो अहमदाबाद से भी अच्छा है।'' यातायात जाम के सवाल पर मोहन ने कहा कि यह सिर्फ बीआरीट गलियारे तक नहीं सिमटा बल्कि यह दिनभर के व्यस्ततम समय में हर जगह दिखाई देता है।

2008 में इसकी शुरुआत से ही यह विवादों में रहा है। दक्षिण दिल्ली के बीआरटी गलियारे को देखते हुए एक अदालत ने इस परियोजना को बंद करने का आदेश दिया था और तब से 14 गलियारों के निर्माण पर रोक लग गई थी। इसकी पक्षधर रहीं दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने आखिरकार चुनाव प्रचार के दौरान इसकी समस्या को समझा और कहा था कि इसे हटा लिया जाएगा।

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