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हम छोड़ चले हैं महफिल को..

हम छोड़ चले हैं महफिल को..

बॉलीवुड में साल 2013 ऐसे तो कई मायनों में कई उपलब्धियों भरा वर्ष साबित हुआ, लेकिन मन्ना डे, प्राण, शमशाद बेगम समेत कई अजीम शख्सियतों के चले जाने से एक ऐसा रिक्त स्थान हो गया, जिसकी कमी शायद ही कभी पूरी हो सके।

खनकती आवाज की मल्लिका कही जाने वाली शमशाद बेगम ने 23 अप्रैल को इस दुनिया को अलविदा कह दिया। शमशाद बेगम का जन्म पंजाब के अमृतसर में 14 अप्रैल 1913 को हुआ। संगीतकार मास्टर गुलाम हैदर ने जब शमशाद की आवाज को सुना तो महज 13 वर्ष की उम्र में एक पंजाबी गीत हथ जोड़िया पंखिया दे गवाया। उस दौर में शमशाद बेगम को प्रति गीत साढ़े 12 रुपये मिला करते थे।

वर्ष 1941 में प्रदर्शित फिल्म खजांची से बेगम ने हिंदी फिल्मों में भी अपना कदम रख दिया। इस फिल्म में उन्होंने अपना पहला गीत सावन के नजारे हैं गाया। वर्ष 2009 में शमशाद बेगम को उनके उल्लेखनीय योगदान को देखते हुय पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

शमशाद बेगम के गाये उल्लेखनीय गीतों में कुछ हैं..मेरे पिया गये रंगून, लेके पहला पहला प्यार, रेशमी सलवार कुर्ता जाली का, तेरी महफिल में किस्मत आजमा के हम भी देखेंगे, कजरा मोहब्बत वाला आंखों में ऐसा डाला, होली आई रे कन्हाई, बूझ मेरा क्या नाम रे, कहीं पे निगाहें कहीं पे निशाना, कभी आर कभी पार, आना मेरी जान संडे के संडे जैसे कई सुपरहिट नगमे शामिल हैं।

जाने-माने फोटोग्राफर जगदीश माली का निधन 13 मई 2013 को हो गया। बंगला फिल्मों के जाने-माने फिल्म निर्देशक और कई राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार विजेता रितुपर्णो घोष का निधन इस वर्ष 30 मई को हो गया। रितुपर्णो घोष का जन्म 31 अगस्त 1963 को कोलकाता में हुआ था। उन्होंने अपनी शिक्षा कोलकाता के प्रतिष्ठित जादवपुर यूनिवर्सिटी से पूरी की। उन्होंने अपने करियर की बतौर निर्देशक वर्ष 1994 में प्रदर्शित बंगला फिल्म हीरेर अंगूठी से की।

वर्ष 1994 में ही प्रदर्शित बंगला फिल्म 19 अप्रैल के लिये रितुपर्णो घोष को सर्वश्रेष्ठ फिल्मकार का राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुआ। उन्हें 12 बार राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 3 जून को जिया खान ने अपने फ्लैट में आत्महत्या कर ली। जिया खान का जन्म 20 फरवरी 1988 को न्यूयॉर्क में हुआ। जिया खान ने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 2007 में प्रदर्शित फिल्म निशब्द से की।

सदी के खलनायक और दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित प्राण भी इस वर्ष 12 जुलाई को इस दुनिया को अलविदा कह गये। प्राण का जन्म 12 फरवरी 1920 को दिल्ली में एक मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था। वर्ष 1940 में प्रदर्शित फिल्म यमला जट से प्राण ने अपने सिने करियर की शुरुआत की।

अपनी जादुई आवाज से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करने वाले मन्नाडे ने भी इस वर्ष 24 अक्टूबर को विदाई ले ली। दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित प्रबोध चन्द्र डे उर्फ मन्ना डे का जन्म 1 मई 1920 को कोलकाता में हुआ था। मन्ना डे ने संगीत की प्रारंभिक शिक्षा अपने चाचा केसी डे से हासिल की। समानांतर सिनेमा में अपने सशक्त अभिनय से खास पहचान बनाने वाले फारूख शेख इस वर्ष 27 दिसंबर को अलविदा कह गये।

शेख का जन्म गुजरात के वडोदरा में 25 मार्च 1948 को जमींदार घराने में हुआ। इस बीच फारूख शेख ने सिद्धार्थ कॉलेज से वकालत की पढ़ाई पूरी की और पुणे फिल्म इंस्टीट्यूट में दाखिला ले लिया। इसके बाद वह भारतीय जन नाटय् संघ (इप्टा) से जुड़ गये और सागर सरहदी के निर्देशन में बनी कई नाटकों में अभिनय किया। वर्ष 1973 में प्रदर्शित फिल्म गरम हवा से उन्होंने अपने सिनेकरियर की शुरुआत की।

साजन, प्रहार जैसी सुपरहिट फिल्में बनाने वाले सुधाकर बोकाड़े भी इस वर्ष 7 जुलाई को इस दुनिया से कूच कर गये। अमिताभ बच्चन को लेकर गिरफ्तार, गंगा जमुना सरस्वती जैसी फिल्में बनाने वाले  एस रामानाथन इस वर्ष 9 जनवरी को अलविदा कह गये। रामानाथन ने अमिताभ को बांबे टु गोआ, महान और गिरफ्तार जैसी फिल्मों में निर्देशित किया था। रामानाथन ने अमिताभ को लेकर जमानत बनायी है, जो अबतक प्रदर्शित नहीं हो सकी।

फिल्मों में सर्वाधिक बार पुलिस इंस्पैक्टर का किरदार निभाने वाले जगदीश राज भी इस वर्ष 28 जुलाई को अलविदा कह गये। जगदीश राज ने 144 बार पुलिस ऑफिसर का किरदार निभाया जिसके लिये उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल किया गया। वर्ष 1952 में प्रदर्शित फिल्म सीआईडी में उन्होंने यह किरदार निभाया था। जगदीश राज की पुत्री अनीता राज बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री हैं।

बीते जमाने के फिल्मकार राजतिलक का इस वर्ष 6 अक्टूबर को निधन हो गया। राजतिलक ने 36 घंटे, चेहरे पे चेहरा और मुक्ति जैसी फिल्मों का निर्देशन किया। इंडियन आइडल सीजन 2 के विनर संदीप आचार्य का निधन इस वर्ष 15 दिसंबर को हो गया। संदीप काफी दिनों से बीमार चल रहे थे। छोटे पर्दे के जाने-माने कलाकार अबीर गोस्वामी का निधन भी इस वर्ष महज 37 वर्ष की उम्र में हो गया। अबीर ने कुसुम, प्यार का दर्द है समेत कई सीरियलों में अभिनय किया।

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