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दातून से पाया बीमारी से छुटकारा

उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में एक ऐसा व्यक्ति है जो दो फुट की दातून से अपने दांतों एवं मुंह की सफाई के बाद उसी दातून से पेट की सफाई करीब 35 वर्षों से नित्य कर रहा है।

जिला मुख्यालय से 35 किमी. दूर बरहज तहसील क्षेत्र के परसियाकू र्ह निवासी 90 वर्षीय राजित मिश्र ने बताया कि उसने पहलवानी की और 1980 के आसपास उसे सांस की बीमारी महसूस होने लगी। उसके निदान के लिए उसने दातून करते समय उसे गले के अंदर डालकर सफाई करना शुरू कर दिया तो उसे सांस की बीमारी से कुछ राहत मिली।

इस क्रिया को करने से जब सांस की बीमारी में लाभ महसूस हुआतो तभी से वह करीब दो फुट लम्बी दातून से करीब 35 वर्षों से इस क्रिया को करता आ रहा है।

मिश्र ने दावा किया कि पिछले 35 सालों से वह कभी गंभीर रुप से बीमार नहीं हुआ और न ही कोई अंग्रेजी दवा का सेवन किया। दातून के रूप में वह केवल बबूल की दातून का ही प्रयोग करता है। उसका मानना है कि नीम की दातून का प्रयोग करने पर दातून के पेट में टूटने का डर रहता है जबकि बबूल की दातून लचीली होने के कारण टूटने का डर नहीं रहता है। 

मिश्र का दावा है कि इस क्रि या को करने से जहां सांस की बीमारी में फायदा हुआ तो उसके साथ ही साथ वह अपने पेट की भी सफाई बडी़ सरलता से कर लेता है। दातून करना उनके जीवन में नित्य क्रिया का एक हिस्सा बन गया है।

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  • Web Title:दातून से पाया बीमारी से छुटकारा