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ड्राइविंग में लापरवाही तो होगी जेल की सजा

नई दिल्ली, वरिष्ठ संवाददाता

लापरवाही से खुद और दूसरों के जीवन को खतरे में डालने वाले वाहन चालक अब सुधर जाएं। ऐसे वाहन चालकों का अब चालान नहीं कटेगा, बल्कि उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज होगी। ट्रैफिक पुलिस द्वारा ऐसे वाहन चालकों के खिलाफ आईपीसी की धारा 279 के तहत आपराधिक मामला दर्ज किया जाएगा। इसमें ओवरस्पीड, खतरनाक ड्राइविंग, लेन वायलेशन और ड्रंकन ड्राइविंग जैसे मामले शामिल हैं। चालक की गिरफ्तारी के अलावा वाहन भी जब्त किया जाएगा। ऐसे मामले में कम से कम छह माह की सजा और एक हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान है।

दिल्ली पुलिस आयुक्त बीएस बस्सी ने वार्षिक प्रेसवार्ता में यह जानकारी दी है। हालांकि ट्रैफिक पुलिस द्वारा आईपीसी की इस धारा का इस्तेमाल ट्रैफिक उल्लंघन करने वाले भारी कॉमर्शियल वाहनों के खिलाफ किया जाता था। पिछले साल इस धारा के तहत 519 वाहन चालकों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। इनमें खासतौर से रात को लेन तोड़कर चलने और ओवरस्पीड वाले ट्रक, ट्राला व डंपर शामिल हैं। अब कार, जीप, ग्रामीण सेवा और दूसरे हल्के कॉमर्शियल वाहन चालकों के खिलाफ भी आईपीसी की धारा 279 के तहत कार्रवाई की जाएगी।

बस्सी ने कहा कि ट्रैफिक पुलिस ने दिल्ली में कई जगहों पर रोड जाम जैसी दिक्कतों से निपटने के लिए बेहतरीन योजनाएं तैयार की हैं, लेकिन इसके लिए सवििक एजेंसियों की मदद चाहिए। हालांकि अभी तक सवििक एजेंसियों के साथ दिल्ली पुलिस का अच्छा तालमेल रहा है। परेशानी: ड्रंकन ड्राइविंग के मामले बढ़े, सजा घटी शराब पीकर वाहन चलाने वाले ड्राइवर ट्रैफिक पुलिस के लिए एक बड़ी परेशानी का सबब बन गए हैं। वजह, ऐसे चालकों की जेल की सजा में कमी आना है।

वर्ष 2012 के मुकाबले पियक्कड़ चालकों की संख्या बढ़ी है, लेकिन जेल की सजा का ग्राफ आधा रह गया है। जहां 2012 में ट्रैफिक पुलिस ने शराब पीकर वाहन चलाने वाले 23829 चालकों के खिलाफ कार्रवाई की थी, वहीं पिछले साल यह आंकड़ा 24564 रहा है। खास बात कि 2012 में ऐसे 6800 चालकों को जेल की सजा हुई थी, जबकि पिछले साल केवल 3628 चालक सलाखों के पीछे भेजे गए। ट्रैफिक पुलिस के अफसरों ने पहले भी इलाका मैजिस्ट्रेट से शराबी चालकों को जेल भेजने की गुहार लगाई थी।

अब दोबारा से ट्रैफिक पुलिस के अतिरिक्त आयुक्त अनिल शुक्ला सहित विभिन्न जोन के डीसीपी भी इलाका मैजिस्ट्रेट से मिल रहे हैं। पिछले साल उत्तरी दिल्ली में ड्रंकन ड्राइविंग के मामलों में 2362 चालकों को जेल की सजा हुई है, जबकि पॉश इलाके यानी दक्षिण दिल्ली में केवल 511 पियक्कड़ ही जेल जा सके। बता दें कि ड्रंकन ड्राइविंग के ज्यादातर मामले दक्षिण दिल्ली में ही देखने को मिलते हैं।

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