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पुलिस कप्तान से मांगी पांच लाख की रंगदारी

प्रतापगढ़। निज संवाददाता

धनाढय़ लोगों से रंगदारी मांगने के मामले तो अक्सर सुने जाते हैं। कुछ जनप्रतिनिधियों से भी ऐसा दुस्साहस किया जा चुका है लेकिन अब तो पुलिसवाले भी सुरक्षित नहीं हैं। बेल्हा में तो सीधे एसपी से ही रंगदारी देने को कहा गया है। यह शरारतन है या साजशि, इसका फैसला तो जांच के बाद हो सकेगा पर इससे इतना तो स्पष्ट है कि ‘खाकी’ का इकबाल दिनोदिन खत्म होता जा रहा है।

नवागत पुलिस अधीक्षक सुरेंद्र कुमार वर्मा ने 28 दसिंबर को जिले का चार्ज लिया और 30 दसिंबर को उन्हें रजिस्टर्ड डाक से एक पत्र मिला। उसमें लिखा है- ‘आप जिले में नए आए हैं, हमसे मिलकर चलेंगे तो करोड़ो कमाएंगे, नहीं तो जहां सीओ जियाउल हक गए हैं वहीं चले जायेंगे। मेरे आदमी काले रंग की ऑल्टो कार (वढ 72 द 1900) में घूम रहे हैं। उनको पांच लाख रुपये दे दो। ’ पत्र में आगे लिखा है- ‘राजदत्त हत्याकांड को तो आप भूल ही जाइए’।

पत्र में ऊपर ही ‘लाल सलाम’ भी लिखा है। इस पत्र में भेजने वाले की जगह अभिषेक तिवारी पुत्र लाल बहादुर तिवारी निवासी मीरा भवन, जिला उद्योग के सामने, प्रतापगढ़ लिखा है। पत्र एसपी के सामने पेश किया गया तो उन्होंने शुक्रवार को मुकदमा दर्ज कराकर तत्काल कार्रवाई का आदेश दे दिया। कोतवाली प्रभारी यूपी सिंह ने बताया कि मुकदमा दर्ज कर मामले की पड़ताल की जा रही है। गौरतलब है कि पत्र में जिन जियाउल हक का जिक्र किया गया है, वह कुंडा के सीओ थे और बलीपुर में प्रधान की हत्या के बाद हुए बवाल में मारे गए थे।

इस मामले में सीओ की पत्नी परवीन आजाद ने क्षेत्रीय विधायक व प्रदेश के खाद्य व रसद मंत्री कुंवर रघुराज प्रताप सिंह (राजा भैया) का नाम लिया था। हालांकि सीबीआई जांच में उन पर आरोप साबित नहीं किया जा सका।

इनका कहना है‘‘यह पत्र चाहे शरारत के लिए भेजा गया हो या फिर कुछ और, इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुकदमा दर्ज कर लिखावट व डाक की पड़ताल कराई जा रही है। जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी।

’’- सुरेन्द्र कुमार वर्मा, एसपी, प्रतापगढ़......................क्या कहते हैं अभिषेक

पत्र में लिखे कार नंबर और पते के आधार पर जब ‘हिन्दुस्तान’ ने खोजबीन की तो जो अभिषेक तिवारी सामने आए वह पेशे से अधविक्ता हैं। उनका कहना है कि मेरी ख्याति से जलने वालों की यह मुझे बदनाम करने की साजशि है। इतने संवेदनशील मामले में पुलिस को आंख मूंदकर मुकदमा दर्ज करने की बजाय पहले पड़ताल कर लेनी चाहिए थी। कोई प्रधानमंत्री के नाम से रंगदारी का पत्र भेज दे तो क्या तब भी पुलिस तत्काल मुकदमा दर्ज कर लेगी?खबर संजीव पाण्डेय।

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