DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

राजधानी व शताब्दी में यात्रा और सुलभ करेगा ‘प्रतीक’

वाराणसी। कार्यालय संवाददाता

राजधानी और शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेनों में विद्युत आपूर्ति के लिए लगने वाले दो जेनरेटर कोच अब नहीं लगेंगे। यह व्यवस्था अब इन ट्रेनों के लिए खासतौर पर डिजाइन किये इंजन ‘प्रतीक’ में की गयी है। वाराणसी स्थित डीजल रेल इंजन कारखाना की यह ऐतिहासिक उपलब्धि है, जिसका लोकार्पण इस कारखाने की स्वर्ण जयंती पर आयोजित समारोह के दौरान शुक्रवार को किया गया। नई व्यवस्था से एक लाभ यह भी होगा कि दोनों ट्रेनों में दो-दो अतिरिक्त यात्री कोच लगाए जा सकेंगे।

दूसरा फायदा यह कि इन ट्रेनों के स्टेशनों पर जेनरेटर कोचों की तेज घड़घड़ाहट से निजात मिलेगी। 4500 अश्व शक्ति के इंजन ‘प्रतीक’ का लोकार्पण डीरेका में रेलवे बोर्ड के सदस्य (यांत्रिक) आलोक जौहरी ने झंडी दिखाकर किया। इसके साथ ही 1964 में में यहां निर्मित पहले डीजल इंजन ‘कुंदन’ को झंडी दिखाकर ‘रिटायर’ कर दिया। धार्मिक अनुष्ठान के बाद इंजन को झंडी दिखाई। श्री जौहरी ने कहा डीरेका ने पिछले एक दशक के दौरान नए आयाम बनाए। जापान और अमेरिका की तकनीकी को भी यहां के विशेषज्ञों ने चुनौती दी है।

इंजन के हॉर्सपॉवर, ड्राइवरों की जरूरत, डुएल कैप, वाइपर, होटल लोड पर विशेष काम करके ‘गजराज’, ‘चेतक’, ‘भीम’ जैसे इंजन विकसित किये। अब नए इंजन ‘प्रतीक’ में 500 के स्थान पर एक हजार केवीए का जेनरेटर लगाने का प्रयास शुरू कर दिया गया है। ‘प्रतीक’ में इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम लगाकर उसे वाणिज्य प्रयोग में लाने का लक्ष्य रखा गया है। पहले तुगलकाबाद जायेगा ‘प्रतीक’वाराणसी। डीरेका के जनसंपर्क अधिकारी प्रदीप मिश्र के अनुसार 4500 अश्व शक्ति वाले डब्लयूडीपी बी-4 होटल लोड रेल इंजन 40079 ‘प्रतीक’ को उत्तर रेलवे के तुगलकाबाद डीजल शेड में भेजा जायेगा।

वर्तमान ईओजी रेल गाड़ियों में दो पॉवर कार यानी जेनरेटर सेट से संचालित होती है। यह है इसकी खासियतरेल इंजन ‘प्रतीक’ 500 केवीए ट्रेन पॉवर लोड की आपूर्ति करेगा। राजधानी और शताब्दी ट्रेन में नहीं लगाने पड़ेंगे दो जेनरेटर कोच तेल की खपत कम होगी, अर्थिक बचत होगी और यात्रियों को सीट मिलेगीकोहरे व आर्द्रता की स्थिति में बेहतर दृष्यता प्रदान करेगाविमानों में इस्तेमाल होने वाली एलईडी आधारित फोकस कैब लाइट की सुविधाड्राइवर सीट को भी ऊंचाई पर सेट किया जा सकता हैडीरेका का पहला इंजन ‘कुंदन’ थमावाराणसी।

डीरेका की बुनियाद 1961 में रखी गई। 1964 में पहले इंजन ‘कुंदन’ को पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने झंडी दिखाकर रवाना किया था। पचास साल तक रेलवे की सेवा करने के बाद इंजन को डीरेका में खड़ा कर दिया गया। फिलहाल, कुंदन मुगलसराय में शंटिंग इंजन के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। इंजन की कार्य क्षमता 34 साल ही मानी जाती है। पर यह पचास साल तक काम करता रहा। डीरेका को मिला एक लाख का ईनामडीरेकाकर्मियों का उत्साहवर्धन करते हुए श्री जौहरी ने एक लाख रुपये का पुरस्कार उन्हें भेंट किया।

समारोह के दौरान महाप्रबंधक बीपी खरे व विभागाध्यक्षों के साथ उन्होंने कार्यशाला का निरीक्षण भी किया। उत्पादन एवं विभिन्न परियोजाओं की प्रगति की समीक्षा की। कर्मचारी परिषद के संयुक्त सचवि अमर सिंह और कर्मचारी संगठनों एससी/एसटी, ओबीसी, रेलवे सुरक्षा बल एसोसिएशन के पदाधिकारियों से मुलाकात भी की।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:राजधानी व शताब्दी में यात्रा और सुलभ करेगा ‘प्रतीक’