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कई जिलों में शुरू भी नहीं हुई योजना

राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना का झारखंड में बुरा हाल है। 2744.16 करोड़ की इस योजना के तहत राज्य के 1गांवों में बिजली पहुंचानी है। यह केंद्रीय योजना है। इसके लिए 0 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार दे रही है। राज्य सरकार को सिर्फ दस प्रतिशत राशि खर्च करनी है। यह राशि भी केंद्र सरकार बतौर ऋण मुहैया करा रही है। योजना को लेकर जेएसइबी और डीवीसी के साथ जुलाई 2005 और एनटीपीसी के साथ अगस्त 2005 में एग्रीमेंट हुआ था। एग्रीमेंट के अनुसार जून 2008 तक सभी 1गांवों तक बिजली पहुंचाने का लक्ष्य तय किया गया। जून 2008 खत्म होने को है, आधे से अधिक जिलों में आज तक योजना की शुरुआत भी नहीं हो पायी है।ड्ढr जेएसइबी को आवंटित सभी जिलों पूर्वी-पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, लातेहार, गढ़वा और पलामू में कार्य प्रगति पर है। एनटीपीसी ने देवघर और जामताड़ा के30-35 गांवों में बिजली पहुंचा दी है। चार जून को रांची, छह जून को लोहरदगा, 20 जून को साहेबगंज ओर 24 जून को पाकुड़ जिले का टेंडर खुला है। काम आवंटन के बाद शुरू कब से होगा, इसकी कोई गारंटी नहीं है। एनटीपीसी ने रांची और देवघर में कार्यालय खोला है। एग्रीमेंट के अनुसार सभी जिलों में कार्यालय खोलना है।ड्ढr डीवीसी को भी आठ जिले आवंटित हैं। कोडरमा, धनबाद ओर बोकारो का कार्य सितंबर 2006 में ही आवंटन किया गया। मार्च-अप्रैल 2007 में काम शुरू हुआ, इसकी प्रगति धीमी है। गुमला और सिमडेगा का टेंडर अक्तूबर 2007 में हुआ। गिरिडीह, चतरा और हाारीबाग का काम मार्च 2008 में आवंटित किया गया। जून 08 में एग्रीमेंट का वक्त खत्म हो रहा है। काम करने के लिए तीनों एजेंसियों को अवधि विस्तार देना मजबूरी है।

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