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सर्दी कम लगेगी, करें कपालभाति

सर्दी कम लगेगी, करें कपालभाति

ठंड अपने चरम पर है। हड्डियों को गलाने वाली इस ठंड में अधिकतर लोगों का सामान्य जीवन बाधित हो जाता है। हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, जोड़ों के दर्द तथा अस्थमा के रोगियों के लिए तो ठंड एक आफत बन कर आती है। कुछ यौगिक क्रियाओं के अभ्यास से ठंड के दुष्प्रभाव से बचा जा सकता है।

यौगिक क्रियाओं के अभ्यास से व्यक्ति न केवल ठंड को मात दे सकता है, बल्कि अपना कार्य सामान्य दिनों की तरह आसानी से कर सकता है। गंभीर रोगों से ग्रस्त व्यक्ति के लिए भी ठंड जानलेवा नहीं हो सकती है। यहां पर उन विशिष्ट यौगिक क्रियाओं का उल्लेख किया जा रहा है, जिनका अभ्यास सभी को करना चाहिए।

सूर्य नमस्कार एवं आसन
योग्य मार्ग दर्शन में इनका अभ्यास करने से शरीर की चयापचयी गति बढ़ती है तथा रक्त संचालन तीव्र होता है। शरीर की सभी मांसपेशियों एवं अंगों में रक्त का शुद्ध संचार होने से शरीर का आन्तरिक तापमान ठीक रहता है और वह बाहर के तापमान से कम प्रभावित होता है। इसके लिए प्रमुख आसन हैं-सूर्य नमस्कार (5 से 7 चक्र), जानु शिरासन, सर्वागासन, हलासन, भुजंगासन, धनुरासन, बकासन, मयूरासन, राजकपोतासन, त्रिकोणासन आदि।

राजकपोतासन की अभ्यास विधि
दोनों पैरों को सामने की ओर फैलाकर जमीन पर बैठ जाएं। बाएं पैर को घुटने से मोड़कर इसके तलवे को दाएं पैर की जांघ से सटाएं। अब दाएं पैर को शरीर के पीछे की ओर ले जाकर बिलकुल सीधा कर दें। दोनों हाथों को बाएं घुटने पर रखकर पूरे धड़ को पीछे की ओर अधिकतम झुकाएं। इस स्थिति में आरामदायक अवधि तक रुकें, तत्पश्चात वापस पूर्व स्थिति में आएं। यही क्रिया दूसरी तरफ भी करें। प्रारम्भ में इनकी 2-2 आवृत्तियों का अभ्यास करें। धीरे-धीरे इनकी संख्या बढ़ाते जाएं।

प्राणायाम
यद्यपि सभी प्राणायाम बहुत अच्छे होते हैं, किन्तु शक्ति, ऊर्जा तथा आन्तरिक तापमान में वृद्धि करने वाले मुख्य प्राणायाम हैं-कपालभाति तथा भस्त्रिका। इनके प्रतिदिन नियमित अभ्यास से ठंढ को कोसों दूर भगाया जा सकता है।

कपालभाति की अभ्यास विधि
ध्यान के किसी भी आसन में रीढ़, गला व सिर को सीधा कर बैठ जाएं। आंखों को ढीली बन्द कर चेहरे को भी ढीला करें। हथेलियों को घुटनों पर सहजता के साथ रखें। अब नासिका से हल्के झटके से श्वास-बाहर फेंके तथा सहज श्वास नासिका द्वारा ही अन्दर लें। लगातार 20 से 25 बार इसका अभ्यास करें। एक हफ्ते बाद इसे 50 तक कर दें। धीरे-धीरे इसे योग्य मार्ग दर्शन में बढ़ाते जाएं। अन्तत: 5 से 7 मिनट तक इसका अभ्यास करें।

विशेष
हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, हाइपर एसिडिटी, हार्निया, स्लिप डिस्क तथा हाइपर थायराइड के रोगी इसका अभ्यास न करें।

अन्य उपाय
वृद्ध तथा कमजोर एवं रोगी योग का अभ्यास करने के साथ शरीर को भी पर्याप्त कपड़ों से ढक कर रखें। अदरक, काली मिर्च, मेथी तथा आजवायन का काढ़ा प्रतिदिन सुबह एवं शाम अवश्य लें।

आहार
ठंड से लड़ने में आहार की भी मुख्य भूमिका है। संतुलित, प्राकृतिक आहार शरीर के लिए अनुकूल होते हैं। मौसमी फल तथा मौसमी सब्जियों एवं साबुत अनाज के सेवन से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता तथा ऊर्जा एवं ऊष्मा बनी रहती है, जिससे ठंड तथा रोग आसपास भी नहीं फटकते। चना, मक्का, बाजरा तथा सोयाबीन का पर्याप्त सेवन करें। सब्जियों का सूप तथा दलहन का सेवन करने से भी ऊष्मा बढ़ती है।

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