DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

चौबीस घंटे बिजली : दावों की हकीकत

पटना। हिन्दुस्तान ब्यूरो। दिसंबर से जिला मुख्यालयों को 24 घंटे बिजली देने का वादा किया गया था, वह फेल हो गया। फिर जनवरी से 24 घंटे सप्लाई का दावा हुआ और अब फरवरी से। दावों की हकीकत पर गौर करें तो यह अभी दूर की कौड़ी दिख रही है। क्योंकि बिजली कंपनी के पास पर्याप्त संख्या में पावर ट्रांसफॉर्मर नहीं है। शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों का फीडर पूरी तरह अलग नहीं है। साथ ही जर्जर तार आदि की समस्या है। इन समस्याओं को ठीक होने में महीनों लगेंगे।

उधर, 24 घंटे बिजली देने के पीछे कंपनी का अपना तर्क है। जिलों को दी जा रही बिजली अगर निकासी (ड्रावल) हो रही है तो माना जायेगा कि लोगों को बिजली मिल रही है। यह दीगर है कि मोहल्लों में ट्रांसफॉर्मर का फ्यूज उड़ जाये, तार गिर जाये या अन्य समस्या के कारण लोगों को बिजली न मिल रही हो। अन्य जिलों की कौन कहे, पटना में ही कई ऐसे मोहल्ले हैं जहां कि 20 घंटे भी बिजली नहीं मिल रही है।

बिजली गुल होने पर उसे बहाल होने में घंटों लग जाते हैं। तार गलने या टूटने की समस्या आम है। दो-तीन सालों से 72 हजार किमी तार बदलने का काम चल रहा है। इसमें अब तब सिर्फ 33 हजार किमी ही तार बदला जा सका है। यह स्थिति तब है जब 24 घंटे बिजली देने को लेकर मुख्य सचवि स्तर पर बीते वर्ष छह बार बैठक हो चुकी है। बिजली कहां से आएगी बिहार का अपना बिजली उत्पादन मात्र 110 मेगावाट है।

शेष बिजली में लगभग दो हजार मेगावाट केंद्रीय सेक्टर, दो सौ मेगावाट बिजली खरीदी जा रही है। राज्य की औसत मांग अभी तीन हजार मेगावाट से अधिक है। फरवरी तक राज्य का अपना उत्पादन में कोई वृद्धि नहीं होगा। जुलाई 2014 के बाद राज्य का अपना उत्पादन 400 मेगावाट होगा। लेकिन, उस समय तक राज्य की मांग 3500 मेगावाट से अधिक हो जायेगी। बिहार में अभी अधिकतम 2400 मेगावाट बिजली मिल रही है। मुख्य सचवि स्तर पर हुई इन छह बैठकों में हुए 24 घंटे बिजली के दावे 9-10 जुलाई 201313-14 अगस्त 201313-14 सितंबर 20138 अक्टूबर 201312-13 नवंबर 201317-18 दसिंबर 2013जिलों में सप्लाई का ये है ताजा हाल मुजफ्फरपुर :150 मेगावाट बिजली की आवश्यकता है।

औसतन 100 मेगावाट बिजली से 18 से 20 घंटे बिजली दी जा रही है। आरा : गर्मी में 40 मेगावाट की आवश्यकता हो जाती है। अभी 20 मेगावाट बिजली मिल रही है। इससे 23 घंटे तक बिजली मिल जाती है।

छपरा : जैसा भुगतान, वैसी बिजली के आधार पर बिजली दी जा रही है। इस नियम के कारण 15-16 घंटे बिजली मिल रही है। कुछ दिन पहले तक 20-22 घंटे बिजली दी जा रही थी। गया: 60 मेगावाट बिजली चाहिए।

कम बिजली मिलने से रोटेशन में फीडर चल रहे हैं। जिला को औसतन 16 घंटे बिजली मिल रही है। (स्त्रोत : हिन्दुस्तान टीम )।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:चौबीस घंटे बिजली : दावों की हकीकत