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पटना-झाझा लाइन के कमजोर ट्रैक पर दौड़ रहीं ट्रेनें

चंदन द्विवेदी पटना। कमजोर रेलवे ट्रैक और फर्राटे भर कर चल रहीं ट्रेनें। दानापुर रेल मंडल में ट्रनों का हाल कुछ ऐसा ही हो गया है। पटरी की डगर पर रेल के सुहाने सफर के बीच यात्रियों की जान जोखिम में है। बात पटना-झाझा रेल लाइन की हो रही है जहां ट्रैक के कमजोर होने बावजूद ट्रेनें हाई स्पीड दौड़ लगा रही हैं।

रेलवे द्वारा ट्रेन चालकों को कुहासे के दौरान सतर्कतापूर्वक चलाने का निर्देश भले ही दे दिया गया हो लेकिन कागज पर जो कुछ दिख रहा है वह चौंकाने वाला है। लापरवाही और खानापूरी भी हो रही खूब खुसरुपुर से करौटा व बख्तियारपुर से अथमलगोला के बीच 75 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेनें गुजरती हैं जबकि रेलवे भी मानता है कि इन दोनों जगहों पर ट्रैक कमजोर हो चुका है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब ट्रैक कमजोर है तो ट्रेनों की स्पीड इतनी ज्यादा क्यों? हालांकि रेल अधिकारियों का कहना है कि ट्रैक कमजोर तो है पर इतनी नहीं कि ट्रेनों की स्पीड कम कर दी जाय।

हाल में कैपिटल के हादसे के बाद भी रेल प्रशासन का सतर्क न होना कई सवाल खड़ा करता है। हालांकि करौटा से बख्तियारपुर के बीच ट्रैक मेंटेनेंस का काम जारी है और वहां 20 किमी, 30 किमी और 50 किमी का कॉशन लगा है। लेकिन हादसे के बाद लकीर पीटते रेल प्रशासन की गंभीरता पटना जंक्शन पर भी नहीं दिखती। पटना जंक्शन पर बदतर हालत पटना जंक्शन पर रेल की पटरियों के मेंटेनेंस का हाल तो और भी बुरा है।

जंक्शन की प्लेटफॉर्म संख्या तीन पर स्लीपर टूटा हुआ है और पटरियों का दम निकल रहा है। ट्रेनों के आने के बाद पटरियां दो इंच नीचे धंस जाती हैं और क्लिप का मुंह खुलने लगता है। जाड़े में चटकती हैं रेल की पटरियांरेल की पटरियां जाड़े के दिनों में चटकती भी खूब हैं। कुछ महीने पहले कैपिटल एक्सप्रेस के इंजन सहित 12 बोगियों के पटरियों से उतरने के पीछे पटरियों का चटकना ही बताया जा रहा है। जाड़े के दिनों में तापमान में उतार चढ़ाव के कारण पटरियों के मेंटेनेंस में विशेष सतर्कता बरतनी होती है ।

ऐसे में पटना-झाझा लाइन पर कमजोर ट्रैक पर स्पीड में ट्रेनें चलाना कितना सही है, इस मामले पर अधिकारी कुछ भी बोलने से बचते हैं।

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  • Web Title:पटना-झाझा लाइन के कमजोर ट्रैक पर दौड़ रहीं ट्रेनें