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डायन कहकर गाली दी जाती थी सलोमी को

‘आधी दुनिया’ नामक पत्रिका में सलोमी ने दिसंबर 2005 में अपनी जीवनी लिखी थी। लिखा था कि मेरा छोटा सा परिवार गांव में बसता था। माता-पिता और दो बच्चे। पिताजी पुलिस विभाग में कार्यरत थे। पढ़ाई के बाद भाई जमशेदपुर में बस गया। बाकी रह गये माता-पिता और अविवाहित बेटी। वह पिताजी और मां की सेवा करने लगी। भय्याद लोगों को शायद अच्छा नहीं लगा। महादेव उरांव पागल का नाटक करने लगा और वह भगत मौलबी ने पास जाने लगा और मुझे डायन कहकर गाली गलौज करने लगा। मुझे मार देने की भी धमकी देने लगा।मुझे लगता था कि वह कहीं मार कर फेंक देगा। महादेव मुझे भगत के पास ले जाना चाहा, किन्तु मैं नहीं गयी। धीर-धीर टोले-मुहल्ले वालों ने मुझसे बातचीत कर दी। घर आना-जाना बंद हो गया। लोग मुझे देखकर राह बदल देते थे। मुझे देख थूकते। मैं सब चीज सहती गयी।ड्ढr 101.2005 की बात है, महादेव का चाचा पंचेत में कार्यरत था, घर आया हुआ था। उस दिन शीत लहरी बहुत जोरों की थी। वह मैदान के लिए तालाब की ओर गया और करीब 7.00-7.30 बजे गिर कर मर गया।ड्ढr आदिवासी समाज का रिवाज है कि दफन के दूसर दिन गांव वालों से मिलकर किसी भगत के पास जाना और मृत्यु का कारण जानना। भगत के पास से लौटकर पूर गांव के बुजुर्गो के सामने पूर खानदान वालों को बुलाया गया। रात के समय 23.1.2005 को मैं बुलाने का कारण पूछी, तो कहा गया कि कल सुबह भगत के पास जाना है। मैंने पूछा, तुम लोग भगत के पास गये थे। क्या बतलाया। वे टालमटोल करने लगे। बात मेरी समझ में आ गयी। मैंने कहा कि तुम लोग मुझे डायन कहते हो। मेरा धर्म नहीं कहता है कि मैं किसी भगत के पास जाऊं, लेकिन मैं चैलेंज (चुनौती देने) करने के लिए जाऊंगी, लेकिन ऐसे वैसे भगत के पास नहीं जाऊंगी। मेर उनके घर से जल्द नहीं लौटने पर मेरी बूढ़ी मां (85 वर्षीय) मुझे खोजने के लिए डिबरी लेकर निकली और मुझे गांव वालों से बहस करते देखा। उस दिन देर रात तक हम मां-बेटी डर से नहीं, बल्कि भगत के पास जाना है, सोचकर सो नहीं पाये, क्योंकि वह काम हमार विश्वास में वर्जित है।. जाहिर है, सलोमी ने अपनी उस कहानी में ही अपने हत्यारों की ओर उंगली उठा दी थी। फिर भी वह मार दी गयी। आखिर, कबतक हम सलोमियों की हत्या देखते रहेंगे!ं

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  • Web Title: डायन कहकर गाली दी जाती थी सलोमी को