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केजरीवाल ने जीता विश्वास

दिल्ली में महज पांच दिन पुरानी अरविंद केजरीवाल की सरकार ने गुरुवार को विश्वास मत जीतकर पहली परीक्षा पास कर ली है। प्रस्ताव के पक्ष में 37 और विरोध में 32 वोट पड़े।

इससे पहले ‘आप’ के नेता मनीष सिसौदिया ने विश्वास प्रस्ताव पेश किया। इस पर करीब साढ़े चार घंटे तक चर्चा चली। इसमें विपक्ष के नेता डॉक्टर हर्षवर्धन ने प्रस्ताव का विरोध किया, जबकि कांग्रेस नेता अरविंदर सिंह लवली ने इसका खुलकर समर्थन दिया।

मतीन बने प्रोटेम स्पीकर: कांग्रेस के विधायक मतीन अहमद प्रोटेम स्पीकर की भूमिका में थे। इसलिए सदन की कुल संख्या 69 थी। ऐसे में बहुमत के लिए 35 मतों की जरूरत थी। ‘आप’ के 28, कांग्रेस के सात, जदयू और निर्दलीय के एक-एक विधायक ने विश्वासमत प्रस्ताव के पक्ष में वोट डाला। भाजपा के 32 विधायकों ने विरोध में मत दिया। यह प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित किया गया।

कांग्रेस का समर्थन क्यों?
आप कहते हैं सभी राजनीतिक दल भ्रष्ट हैं, आपकी ही पार्टी ईमानदार है। आप कांग्रेस को भ्रष्ट कहते हैं और उससे समर्थन लेने में कोई ऐतराज भी नहीं है। दूसरों पर लांछन लगाना आसान है, लेकिन ईमानदारी उसे कहते हैं जब पूरी दुनिया बोले। उसके लिए पब्लिसिटी करने की जरूरत नहीं होती है।
- डॉ. हर्षवर्धन, भाजपा नेता

तो पांच साल तक देंगे साथ
केजरीवाल जी, आप बार—बार बयान दे रहे थे कि सरकार 48 घंटों में भी गिर सकती है। आज मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि जब तक आप दिल्ली के लोगों के हित में फैसले करते रहेंगे, तब तक आपकी सरकार को कोई खतरा नहीं है। हम पांच साल तक समर्थन देने के लिए तैयार हैं।
- अरविंदर सिंह लवली, कांग्रेस नेता

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