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पुलिस नहीं बन पाई लोगों की दोस्त

नई दिल्ली, वरिष्ठ संवाददाता

दिल्ली पुलिस का वर्ष 2013 मिला-जुला रहा। जहां एक ओर दिल्ली पुलिस मेवाती और आतंकियों से निपटने में कामयाब रही तो वहीं दूसरी तरफ लोगों के लिए चलाई गई कई योजनाएं ज्यादा कारगर साबित नहीं हुई। महिला से जुड़े् अपराधों को रोकने में भी पुलिस कुछ खास नहीं कर सकी। हत्या जैसे अपराधो में मामूली कमी आई है। ज्ञात हो दिल्ली पुलिस ने वर्ष 2013 में मामला दर्ज करने में पहले से कमी आई है। हालांकि इस वर्ष दिल्ली पुलिस ने साइबर अपराधों के ज्यादा मामले दर्ज हैं।

आतंक को नहीं उठाने दिया सरदिल्ली पुलिस के लिए सबसे बड़ी कामयाबी यह रही कि वर्ष 2013 में दिल्ली में कोई भी बड़ा आतंकी हमला नहीं हुआ। पुलिस की चौकसी और प्रयासों के चलते ऐसा हो सका। वहीं कथित आतंकी अब्दुल करीम टुंडा को पकड़ कर दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की। हालांकि दिल्ली पुलिस की लियाकत अली को आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के लिए गिरफ्तार करने पर काफी किरकिरी भी हुई। आईपीएल मैच फिक्सिंगआईपीएल में होने वाले मैचों में सट्टेबाजी का खुलासा कर दिल्ली पुलिस ने इस वर्ष सबको चौंका दिया।

पुलिस ने श्रीसंत जैसे अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी सहित दर्जन भर लोगों को सटेबाजी के आरोप में गिरफ्तार किया। इस खुलासे से दिल्ली पुलिस ने वर्ष 2013 में सबसे ज्यादा वाह-वाही बटोरी। इस मामले में पुलिस ने कई बड़े् क्रिकेटरों एवं सटोरियों के बीच सांठगांठ कर खेले जा रहे मैचों का खुलासा किया। पुलिस ने मामले में कई बड़े् कारोबारियों से भी पूछताछ की, लेकिन बाद में उन्हें क्लीनचिट दे दी गई। एनकाउंटर में बदमाश किए ढेम्रवर्ष 2013 में दिल्ली पुलिस ने कई बदमाशों को मुठभेड़ में मार गिराया।

इसमें सबसे अहम एनकाउंटर कुख्यात गैंगस्टर नीतू दाबोदिया का रहा। स्पेशल सेल की टीम ने नीतू व उसके गिरोह के दो अन्य बदमाशों को वसंतकुंज में हुई मुठभेड़ के दौरान मार गिराया था। अपराध शाखा ने जहां मुठभेड़ के बाद कुख्यात बदमाश मनोज मोरखेड़ी को गिरफ्तार कर लिया, वहीं उसके साथी की गोली लगने से मौत हो गई थी। बीते वर्ष की शुरूआत में सुभाष प्लेस में पुलिस ने घेरकर मेवाती गिरोह के साथ मुठभेड़ में एक बदमाश को मार दिया था।

उस घटना के बाद दिल्ली में मेवातियों का कहर कम हो गया था। मामले दर्ज करने में नहीं बरती कोताही दिल्ली पुलिस ने वर्ष 2013 में मामले दर्ज करने में कुछ ही मामलों में आनाकानी की। इसका परिणाम यह रहा कि इस वर्ष दिल्ली के सभी थानों में एफआईआर की संख्या में इजाफा हुआ। खासतौर पर पुलिस ने महिलाओं से जुड़े् अपराधों में सबसे ज्यादा मामले दर्ज किए। पुलिस ने महिलाओं और बच्चों से जुड़े् मामलों को दर्ज करने में देरी नहीं दिखाई।

इसके अलावा लोकल थानों में साइबर अपराधों से जुड़े् मामले भी खुब दर्ज हुए। महिला सुरक्षा अहम मुद्दावसंत वहिार गैंगरेप के बाद भले ही दिल्ली पुलिस ने काफी बदलाव किए हों लेकिन यह अब भी एक बड़ा मुद्दा है। महिलाओं की माने तो अब भी वह रात में दिल्ली की सड़कों में जाने से डरती हैं। इसके अलावा जब हिन्दुस्तान ने भी रात में पुलिस के प्रबंधों का जायजा लिया था तो पुलिस के दावे खोखले साबित हुए थे। वसंत वहिार गैंगरेप के बाद भी बलात्कार और छेड़छाड़ के मामलों में वृद्धि आई है।

पुलिस इस वर्ष भी कई और नये उपाय कर रही है जिससे महिलाएं दिल्ली में सुरक्षित महसूस करें। स्कीम हुई फेलदिल्ली पुलिस द्वारा चलाई गई युवा, आपका अपडेट आदि कई मुहिम अपना कारगर असर नहीं दिखा सकी। पुलिस ने यह सभी कार्य लोगों और पुलिस के बीच तालमेल बेहतर करने और पुलिस को एक दोस्त की छवि दिलवाने के लिए शुरू किए थे। इसके अलावा ‘नो योर पुलिस स्टेशन’ जैसी पहल भी असफल रहीं।

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