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राजधानी के सबसे बड़े तालाब में बन रहा है जहर

राजधानी का सबसे बड़ा तालाब एक बार फिर पूरी तरह से प्रदूषित हो गया है। इसका पानी नीला होने लगा है। तालाब में भैंस धोने के काम भी जारी है। इससे पानी जहरीला होने लगा है। मछलियों पर खतरा मंडराने लगा है। गत वर्ष बड़ी संख्या में मछलियां मर गयी थीं। इसके बाद भी तालाब की सफाई पर ध्यान नहीं दिया गया।ड्ढr बड़का तालाब के सौंदर्यीकरण की बात तो दूर इसे प्रदूषण से बचाने के लिए भी कोई कदम नहीं उठाया गया। झारखंड उच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी गठित कमेटी डिफंग हो गयी। कमेटी ने अपनी जिम्मेवारी नहीं निभायी। आइएएस सजल चक्रवर्ती की देखरख में कमेटी का गठन किया गया था। इसमें रांची के तत्कालीन डीसी को भी शामिल किया गया था। कमेटी राजधानी के विभिन्न मुहल्लों से निकलनेवाली नालियों का पानी तालाब में गिरने से रोकने के लिए उचित कार्रवाई नहीं कर सकीं। अस्पताल का पानी भी इसी तालाब में जा रहा है।ड्ढr पूर्व आइएफएस जवाहर लाल श्रीवास्तव ने ग्लोबल वार्मिंग से सचेत रहने की बात कहते हुए कहा कि बड़ा तालाब में ब्लू-ग्रीन एलगी (हरी काई) बनने लगी है, जो हाइड्रोजिल-एनी नामक जहर उत्पन्न करती है। यह जहर मछलियों सहित जल में रहने वाले अन्य जीवों के लिए भी खतरनाक है। अगर हरी काई का बनना जारी रहा, तो इस बार भी काफी संख्या में मछलियां मरंगी। उन्होंने कहा कि तालाब के चारों ओर पीपल का पेड़ लगा दिया जाये, तो प्रदूषण नियंत्रित होगा और पानी भी साफ रहेगा।ड्ढr पीपल का पेड़ 1715 किलो ऑक्सीजन देता हैड्ढr रांची। ग्लोबल वार्मिग के मद्देनजर यह आंकड़ा स्पष्ट करता है कि पीपल का पेड़ कितना आवश्यक है। एक पीपल के पेड़ से हर रो 1715 किलो ऑक्सीजन निकलता है। इतनी मात्रा में ऑक्सीजन से पांच लाख लोगों को लाभ मिल सकता है। वहीं एक पीपल का बड़ा पेड़ 2215 किलो कार्बन डाइऑक्साइड ग्रहण करता है। इससे स्पष्ट है कि दस पीपल का पेड़ लगा देने पर बड़ा तालाब के चारों ओर प्रदूषण बिल्कुल मुक्त रहेगा और शुद्ध हवा लोगों को मिलेगी।ं

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