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अब 35 बांकुरों में होगा चुनावी रण

आगरा। वरिष्ठ संवाददाता

अंबेडकर विवि छात्रसंघ का रण अब 35 बांकुरों के बीच होगा। गुरुवार को तीन अध्यक्ष पद के दो समेत तीन प्रत्याशियों ने नामांकन वापस ले लिया। नाम वापसी की प्रक्रिया के बाद छात्रसंघ के उम्मीदवार जोर-शोर से प्रचार में जुट गए हैं। गुरुवार को खंदारी कैंपस में प्रत्याशियों ने पूरी ताकत झोंक दी।

खंदारी कैंपस के जेपी सभागार में गुरुवार को नाम वापसी होनी थी। सबसे पहले अध्यक्ष पद के निर्दलीय प्रत्याशी राहुल दीक्षित ने नाम वापस लिया। इसके बाद एबीवीपी से अध्यक्ष पद के लिए पर्चा भर चुके कुलभूषण गौतम उर्फ लाले भी चुनाव मैदान से हट गए। पुस्तकालय मंत्री समेत संयुक्त सचवि के लिए नामांकन करने वाली हिमानी देवी ने भी पुस्तकालय सचवि पद से नाम वापस ले लिया है। अब वह संयुक्त मंत्री पद के लिए लड़ेंगी। वह सपा छात्रसभा की प्रत्याशी हैं।

यानि अब 12 सीटों के लिए 35 के बीच सीधी लड़ाई होगी। मुख्य चुनाव अधिकारी और डीन छात्र कल्याण प्रो. राजेन्द्र शर्मा ने बताया कि इस बार किसी का पर्चा खारिज नहीं किया गया है। सभी ने पूरी सावधानी के साथ नामांकन किया था। सहायक चुनाव अधिकारी डा. ब्रजेश रावत, डा. देवेन्द्र शर्मा, डा. भूपेन्द्र स्वरूप शर्मा, डा. बिंदुशेखर शर्मा, डा. मनुप्रताप सिंह भी इस दौरान मौजूद रहे। मैदान में डटे बागी, मांगे वोट अध्यक्ष पद के लिए एबीवीपी के बागी प्रत्याशी पंकज पाठक मैदान में डटे हुए हैं।

इसी तरह एनएसयूआई की ओर से राहुल पाराशर भी अध्यक्ष पद के लिए वोट मांग रहे हैं। उनका कहना है कि वही संगठन के अधिकृत उम्मीदवार हैं। माना जा रहा है कि दोनों अपने संगठनों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। दोनों संगठनों का आला नेतृत्व इन्हें मनाने की कोशशि कर रहा है। दिल्ली तक पहुंच गई लड़ाई इधर एनएसयूआई की अंदरूनी लड़ाई दिल्ली तक पहुंच गई। लखनऊ और दिल्ली से आगरा विवि के प्रत्याशियों के बारे लगातार फोन घनघनाए जाते रहे।

केंद्रीय नेतृत्व ने राष्ट्रीय महासचवि कुमार राजा को आगरा भेजा। उनके साथ राष्ट्रीय सचवि फिरोज खान, प्रदेश अध्यक्ष अवनीश काजला ने बैठक की। आखिर में एनएसयूआई में मनीष गौतम के नाम पर सहमति बन गई। कैंपस में दिखा छात्रों का विरोधी छात्रसंघ चुनाव का हमेशा से विरोधी रहा तथाकथित छात्रनेता फिर कैंपस में दिखने लगा है। प्रत्याशियों से क्षेत्र विशेष के वोटों के लिए सौदेबाजी में लगा है। गुरुवार को उसने एक संगठन के प्रत्याशियों के साथ वोट मांगे। सूत्रों की मानें तो बीते साल संगठन के प्रत्याशी को हराने के लिए उसने क्षेत्र विशेष के छात्रों की लॉबिंग की थी।

इसके बावजूद संगठन में उसका दबदबा कायम है।

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