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बदले-बदले नजर आए ‘आप’ के सरकार

आंदोलन से लेकर सियासत तक का दो साल का सफर। शायद ऐसा कभी नहीं हुआ कि केजरीवाल 25 मिनट बोलें और कांग्रेस-भाजपा को खरी-खोटी न सुनाएं। मगर दिल्ली विधानसभा में गुरुवार को ऐसा ही हुआ। वह भी तब, जब कांग्रेस और भाजपा के तमाम हमलों केबाद वह सदन को संबोधित कर रहे थे।

दोपहर दो बजे सदन में पेश हुए विश्वास मत प्रस्ताव पर लगभग 4 घंटे तक भाजपा और कांग्रेस ने केजरीवाल पर तीखे हमले किए। सदन के भीतर मौजूद दर्शक हों या फिर टीवी के जरिये उन्हें सुन रहे लोग, हर किसी को लग रहा था कि केजरीवाल अपने अंदाज में उन आरोपों का करारा जवाब देंगे। मगर केजरीवाल ने जैसे अपना एजेंडा पहले ही तय कर रखा था। 25 मिनट के अपने संबोधन में उन्होंने आलोचना के व्यंग्य बाणों को नजरंदाज करते हुए एक मंजे नेता और कुशल प्रशासक की छवि पेश की।

चर्चा के दौरान ही तैयार किए गए अपने जवाब में केजरीवाल ने बड़ी सूझबूझ से बिजली कंपनियों के ऑडिट और खुदरा क्षेत्र में विदेशी निवेश के मुद्दे पर भाजपा को साथ खड़ा कर लिया जबकि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने के एजेंडे पर भाजपा और कांग्रेस, दोनों की हामी भरवा ली। इतना ही नहीं भाषण के अंत में उन्होंने दिल्ली में सुराज और स्वच्छ राजनीति का साथ देने के तीन सवाल पूछ कर औरों की सियासत गड़बड़ा दी। कौन कह सकता था कि हम इन सवालों पर साथ नहीं है। भाजपा के एक सदस्य के दिल की आवाज जुबां तक चली भी आई और सदन ने सुना ‘हम साथ हैं।’

 

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  • Web Title:बदले-बदले नजर आए ‘आप’ के सरकार