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कविताओं के जरिए याद किए राष्ट्रकवि

बदायूं। हिन्दुस्तान संवाद

देश विदेश में अपनी कविताओं से धूम मचाने वाले राष्ट्रकवि डा. ब्रजेंद्र अवस्थी का 83 वां जन्म महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। जिसमें नगर के समस्त रचनाकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया। डा. ब्रजेंद्र अवस्थी फाउंडेशन के तत्वावधान में पथिक चौक वैंकट हाल में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि अपर सत्र न्यायाधीश श्यामप्रति नारायण त्रिपाठी ने दीप प्रज्जवालित करके किया।

वरिष्ठ अतिथि सुभाष आहूजा ने सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर किया। विशाल गाफिल ने काव्य परंपरा का निर्वाह करते हुए सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। कवि अभिषेक अनंत ने कुछ इस तरह कहा कशिारदा पुत्र मेरा नमन आपको ह्दयांगन का सुरभिन चमन आपकोविनोद सक्सेना बिन्नी ने कहा कि अवस्थी जी की स्मृति में अपनी पंक्तियों में कुछ ऐसे कहा कि यकी होता नहीं है कि जहां में तू नहीं हैयही अहसास होता है यहीं पर तू कहीं हैकमला कमल ने कहा किनसीबो पर नही चलते, नजीरों पर नहीं चलतेबड़े् जो वास्तविक होते, लकीरों पर नही चलतेअरविंद धवल ने कहा कि जाने को तो इस दुनिया से हम सबको भी जाना हैइतना प्यार कर जाना सब के वश की बात नहींजयपुर से आयी डा. अवस्थी की अनुजा सुपुत्री तृप्ति मिश्रा ने कहा कि गोद में तो जिसकी पले बढ़े हुए है हमउसका ही जन्मदिन आज है मना रहे अक्षर का ज्ञान जिसने सिखाया हमको हैउसी के सहारे सुरसरिता वहा रहे ।

वरिष्ठ काव्यकार डा.राम बहादुर व्यथित ने कहा कि कलम बिक न सके इस बाजार मेंझूठ को झूठ सच की कहानी लिखोसिर हो वे कलम कोई चिंता नहींशीश झुक न सके, वो निशानी लिखो। इस मौके पर नरेंद्र गरल, वेदऋचा, चंद्र प्रकाश दीक्षित,डा. पूर्ति मिश्रा, भूराज सिंह राज लायर, मधुकर मिश्र, संजय सक्सेना, सुवीन माहेश्वरी, आशीष वशिष्ठ, तेजस्वी नरेंद्र, ठाकुर आदित्य तोमर आदि ने अपनी काव्य पाठ किए। कार्यक्रम का संचालन कुलदीप अंगार ने किया।

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