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मानेकशा के सम्मान में ध्वज झुकाना भूल गई थी सेना

देश के पहले फील्ड मार्शल सैम मानेकशा की अंत्योष्टि में शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व के नदारद रहने पर सेना भले ही अफसोस जता रही हो, लेकिन यह भी सच है कि अपने महान सैनिक के शोक में सैन्य नेतृत्व अपना ध्वज झुकाना भी भूल गया था। सेना को ध्वज झुकाने की याद भारतीय नौसेना ने दिलाई जो परंपरागत रूप से सेवारत प्रमुखों का निधन होने की स्थिति में ध्वज झुकाती रही है। सेना के एक उच्च पदस्थ सूत्र ने बताया कि फील्ड मार्शल को सेवा निवृत्त नहीं माना जाता, लिहाजा जब शुक्रवार को बड़े सवेरे सैम बहादुर का निधन हुआ तो नौसेना ने अपना ध्वज झुका दिया। इसके बाद सेना मुख्यालय में चुिनंदा अधिकारियों की मंत्रणा हुई और तब जाकर फील्ड मार्शल के शोक में ध्वज झुकाने का निर्णय आनन-फानन में लिया गया। सूत्र ने कहा कि नौसेना द्वारा ध्वज झुकाए जाने के बाद सेना के पास और कोई विकल्प नहीं था और बैठक में निर्णय की औपचारिकता ही पूरी की गई। ध्वज झुकाना भूलने और नौसेना के बाद भूल सुधारे जाने की यह बात ऐसे समय सामने आई है, जबकि बांग्लादेश मुक्ित के नायक के पूर्ण राजकीय सम्मान से किए गए अंतिम संस्कार में शीर्ष राजनीतिक एवं सैन्य नेतृत्व के नदारद रहने के अफसोस से देश अभी उबरा भी नहीं है। सेना प्रमुख जनरल दीपक कपूर ही ठोस कारण से अनुपस्थित थे क्यों कि वह रूस की यात्रा पर गए हुए थे। सेना के सूत्रों ने कहा कि अभी इस बात पर सैन्य अधिकारियों में बहसों का दौर थमा नहीं है कि सत्तापक्ष ही नहीं, बल्कि विपक्ष का भी कोई बड़ा राजनीतिक नेता फील्ड मार्शल को अंतिम विदाई देने क्यों नहीं पहुंचा। फील्ड मार्शल को श्रद्धांजलि देने के लिए एक शोक पुस्तिका सोमवार से इंडिया गेट पर रखी जा रही है जिसमें भावांजलि दर्ज करने की शुरुआत स्वयं सेना प्रमुख जनरल कपूर करेंगें। इस पुस्तिका में आम जनता दो जुलाई तक फील्ड मार्शल के बारे में अपने उद्गार व्यक्त कर सकेगी। सेना के सूत्रों ने कहा कि इंडिया गेट पर भावांजलि के इस आयोजन को पूरी गरिमा के साथ संपन्न कराने का निर्णय लिया गया है, ताकि अंत्योष्टि के समय शीर्ष नेतृत्व की गैर हाजिरी से हुई जग हंसाई के घावों को भरा जा सके। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताआें के भी इस भावांजलि कार्यक्रम में शामिल होने की प्रबल संभावना है। इसके अलावा सेना ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक बनाए जाने के प्रस्ताव पर भी नए सिरे से जोर देने का फैसला किया है ताकि आजादी के बाद के तीन युद्धों में शहीद हुए करीब पचास हजार सैनिकों के सम्मान में शीश जवाने का स्थान बनाया जा सके। रक्षा मंत्री एके एंटनी पहले ही इस स्मारक के निर्माण के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से हस्तक्षेप करने का आग्रह कर चुके है। समझा जाता है कि रक्षा मंत्रालय इसके लिए एक कैबिनेट नोट भी तैयार कर रहा है।

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  • Web Title: मानेकशा के सम्मान में ध्वज झुकाना भूल गई सेना