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अभद्र संदेश, तस्वीरें भेजना गरिमा को ठेस पहुंचाना है: अदालत

पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने व्यवस्था दी है कि अभद्र संदेश भेजना एवं इंटरनेट पर युवा लड़कियों की तस्वीरें डालना महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के समान है। इसी के साथ अदालत ने एक आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।
      
न्यायमूर्ति महिन्द्र सिंह सुल्लर ने यह व्यवस्था देते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं दिनों दिन बढ़ रही हैं तथा इससे हमारे समाज का तानाबाना बिगड़ रहा है। इनसे कड़ाई से निबटने की जरूरत है।
      
अदालत ने आदर्श सिंह की अग्रिम जमानत की यचिका सुनते यह बात कही। आदर्श एवं एक अन्य सह आरोपी के खिलाफ अमृतसर पुलिस ने भारतीय दंड संहिता तथा सूचना प्रौद्योगिकी कानून 2000 के तहत महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने का मामला पिछले सितंबर 24 अप्रैल को दर्ज किया था।

अदालत ने कहा कि संदेश इतने अभद्र एवं तस्वीरें इतनी आपत्तिजनक हैं कि उन्हें खुलकर बताना भी मुश्किल हैं और उन्हें सीलबंद लिफाफे में रखा गया है। उन्होंने कहा कि आरोपियों के खिलाफ लगाये गये आरोपों के समर्थन में रिकार्ड में प्रथम दृष्टया पर्याप्त सबूत हैं।

अभियोजन का दावा है कि पिछले साल 28 नवंबर को शिकायतकर्ता की शादी होने वाली थी। याचिकाकर्ता ने लड़की और उसके रिश्तेदार को बेहद अभद्र संदेश भेजे ताकि उससे धन वसूली की जा सके। उन्होंने उसकी आपत्तिजनक तस्वीरें इंटरनेट पर डाल दी। शिकायतकर्ता ने उन्हें हटाया नहीं और उन्हें सबूत के तौर पर अपने मोबाइल फोन पर सुरक्षित रख लिया।

जांच अधिकारी ने संदेश के ब्यौरे प्राप्त किये और शिकायतकर्ता की तस्वीरें इंटरनेट से हासिल की तथा याचिकाकर्ता के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट हासिल किये। अदालत का यह आदेश पिछले साल दिसंबर में आया था।

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