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विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि नरम पड़ी: एचएसबीसी सर्वे

विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि नरम पड़ी: एचएसबीसी सर्वे

बैंकिंग एवं वित्तीय क्षेत्र की बहुराष्ट्रीय कंपनी एचएसबीसी के एक प्रतिष्ठित मासिक सर्वेक्षण के अनुसार दिसंबर के दौरान भारत में विनिर्माण क्षेत्र की की वृद्धि दर में हल्की गिरावट दर्ज की गयी।

विनिर्माण क्षेत्र के उद्योगों के परचेजिंग मैनेजरों के बीच किये गये सर्वेक्षण पर आधारित एचएसबीसी पीएमआई सूचकांक दिसंबर में हल्का घटकर 51.3 रहा। नवंबर में पीएमआई विनिर्माण सूचकांक 50.7 अंक था।

सूचकांक 50 से ऊपर होने का अर्थ है कि दिसंबर में भारत में विनिर्माण गतिविधियों में वृद्धि जारी रही, पर इस क्षेत्र में उत्पादन वृद्धि की दर नवंबर की तुलना में हल्की हुयी। एचएसबीसी के भारत और आसियान क्षेत्र संबंधी अर्थशास्त्री लीफ एस्केसेन ने कहा कि आज के आंकड़े दर्शाते हैं कि विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर हल्की बनी हुयी है और बुनियादी अड़चनों के बने रहने के नाते इसके रफ्तार पकड़ने में कठिनाई हो रही है।

एचएसबीसी ने कहा कि भारत के विनिर्माण क्षेत्र के लिए 2013 सकारात्मक धारणा के साथ समाप्त हो रहा है। परिचालन का वातावरण लगातार दूसरे महीने दिसंबर में भी बेहतर हुआ है। उत्पादन और नये आर्डरों में वृद्धि दिखी है। यद्यपि एचएसबीसी का कहना है कि दिसंबर में विनिर्माताओं को मिले ऑर्डरों की वृद्धि दर अपेक्षाकृत हल्की रही।

उद्योग वार विश्लेषण से दिखा है कि उत्पादन का विस्तार मुख्यत: अभी उपभोक्ता वस्तुओं के कुछ छोटे क्षेत्रों तक ही सीमित है। निर्यात भी लगातार तीसरे महीने बढ़ा है। महंगाई दर के बारे में इस सर्वे पर आधारित रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में कुल मिलाकर मुद्रास्फीति की दर ज्यादा है। मुद्रास्फीति की दृढ़ता मुख्य रूप से धातु, रसायन और कपड़ा जैसे कच्चे माल के लिए दी जाने वाली ऊंची कीमत के कारण है।

सर्वे में कहा गया है कि भारत में उत्पादों की कीमत में लगातार सातवें महीने तेजी दर्ज की गयी है। एस्केसेन ने कहा कि इस तरह मुद्रास्फीति का दबाव बराबर बना हुआ है और मुद्रास्फीति हटाने से भी नहीं हट रही है। ऐसे में रिजर्व बैंक को मुद्रास्फीति कम करने के लिए फिर कार्रवाई करनी पड़ सकती है और मौद्रिक नीति कड़ी करनी पड़ सकती है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार नवंबर में खुदरा मुद्रास्फीति 11.24 प्रतिशत पर पहुंच गयी थी, जो नौ माह का उच्चतम स्तर है। इसी तरह थोक मुद्रास्फीति नवंबर में 7.52 प्रतिशत पर पहुंच गयी थी, जो 14 माह के उच्चतम स्तर था। रिजर्व बैंक ने 18 दिसंबर को मध्य-तिमाही समीक्षा में अपनी नीतिगत ब्याज दर में कोई परिवर्तन नहीं किया था।

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