अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

जाहि विधि राखे राम

बहुत कम लोग ‘जिस विधि राखे राम’ के सिद्धांत में विश्वास करते हैं। अभावों के बावजूद ठहाके लगाते हैं। जिनका स्वभाव असंतोष का होता है वे सब कुछ होते हुए भी नाखुश रहते हैं। असंतोष का कारण क्या होता है? कई बार यह हमारी अत्यधिक इच्छाओं का परिणाम होता है। कभी-कभी दूसर की उन्नति हमार असंतोष का मूल बन जाती है। बहुत बार हम यह जान भी नहीं पाते कि क्या है जो हमें असंतुष्ट कर रहा है। इस प्रसंग में ग्रिम्स की कहानी ‘मछुआरा और उसकी पत्नी’ की याद आती है। समुद्र तट के पास के एक नाले में रहनेवाली मछुआरिन अपने पति को समुद्र के देवता के घर मांगने के लिए ोजती है। वह इच्छा पूरी होते ही संतुष्ट होने के बजाए और मांगें रखती जाती है, अंत में क्रुद्ध देवता उसे वापिस नाली में ोज देते हैं। इसी भाव की कहानी संस्कृत में मिलती है जहां एक चूहे की इच्छाएं जब रुकना ही नहीं चाहतीं तब उसे ‘पुनमरूषको भव’ की स्थिति में पहुंचना पड़ता है। ये सभी कहानियां अलग देशों और भाषाओं से हैं, पर मूल संदेश एक ही है। आज समाज की अधिकांश परशानियों का कारण यही असंतोष है। जितना है उससे असंतुष्ट मनुष्य ज्यादा की इच्छा लिए भागदौड़ करने में मन की सुख शांति खोकर भी कुछ सीख नहीं पाता। इंसान जीवन के मूल्यों को भूलता जा रहा है, रिश्तों की पकड़ छोड़ता जा रहा है। असंतोष से ग्रस्त मनुष्य अपने को पॉजिटिव बताता है, उसके अनुसार संतोष मनुष्य को निष्क्रिय बना देता है। कुछ हासिल करने की कामना ही कर्म की प्रेरणा देती है। पर यह अपने को बहलाना है। यह रास्ता उन्नति का नहीं अवनति का है। असली उन्नति ‘थोड़ा और’ पाने की कामना को रोकने में है। यह सोचना जरूरी है कि कितना काफी है। जब तक इच्छाओं की सीमा तय नहीं कर पाएंगे, तब तक वे सुरसा की तरह बढ़ती हुई हमें अपने काबू में कर लेंगी।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: जाहि विधि राखे राम