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अफसरों की सुस्ती से सरकार की छवि पर असर: आजम

 प्रमुख संवाददाता/राज्य मुख्यालय

प्रदेश के नगर विकास मंत्री मो. आजम्म खां ने प्रदेश में राजीव आवास योजना की धीमी प्रगति पर नाराजगी जताई है। उन्होंने चेताया कि अफसरों की इस उदासीनता से प्रदेश सरकार की छवि खराब हो रही है। इसके लिए सम्बन्धित अधिकारी जिम्मेदार हैं।

हैरानी की बात है कि यह योजना दो साल बाद भी केवल कागजों तक ही क्यों सिमट कर रह गई है? उन्होंने इस योजना में पूर्वी उत्तर प्रदेश व बुन्देलखण्ड के शहरों को भी शामिल करने के निर्देश दिये। श्री खां केन्द्र सरकार द्वारा संचालित राजीव आवास योजना की प्रगति की बुधवार को यहां समीक्षा कर रहे थे। बैठक में ही प्रदेश के आठ शहरों, गाजियाबाद, झांसी, अलीगढ़, बरेली, गोरखपुर, शाहजहांपुर, इलाहाबाद तथा सहारनपुर में योजना के तहत 250 करोड़ रुपए की लागत से 4390 मकानों को बनाये जाने संबंधी प्रस्ताव का अनुमोदन किया जाना था, लेकिन अभी मामला कागजों में ही उलझा हुआ है।

राजीव आवास योजना के तहत रामपुर, रायबरेली (दो फेस), लखनऊ, आगरा, कानपुर नगर व कन्नौज शहर की स्लम बस्तियों में 31.68 करोड़ रुपये की लागत में 2584 मकान बनाये जाने के प्रस्ताव केन्द्र द्वारा अनुमोदित कर दिये गये हैं लेकिन अभी सिर्फ रायबरेली शहर में ही आवास निर्माण शुरू हुआ है। अन्य शहरों की परियोजनायें किसी न किसी विभागीय स्तर पर लम्बित हैं। मथुरा, मुजफ्फरनगर, फिरोजाबाद, मुरादाबाद, वाराणसी, मेरठ और इटावा शहरों की स्लम बस्तियों में कुल 254 करोड़ रुपये की लागत से 3781 आवास बनाये जाने के प्रस्ताव केन्द्र सरकार के विचाराधीन हैं।

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