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लाइलाज बीमारी नहीं है टीबी

रांची। कंचन सिन्हा

टीबी अब लाइलाज बीमारी नहीं है। समय पर जांच और लगातार दवा खाने से यह पूरी तरह से ठीक हो सकता है। डॉट्स और सरकारी अस्पतालों में बीमारी को लेकर लगातार काम हो रहा है। आम लोगों की मानें तो दवा खाते हुए सामान्य काम-काज कर लोग डॉट्स से लाभान्वित हो रहे हैं। बहुत से ऐसे लोग हैं, जो टीबी की नई दवा व्यवस्था को वरदान मानते हैं। उनका तजूरबा भी यही है कि सालों से बीमार लोग लगातार दवा खाने से ठीक हो रहे है।

आरएनटीसीपी की ताजा रिपोर्ट के अनुसार में पूरे झारखंड से 36,666 केस ट्रीटमेंट के लिए रजिस्टर्ड है। वहीं 167 केस एमडीआर टीबी के दर्ज हुए हैं। इधर डब्ल्यूएचओ (वर्ल्ड हेल्थ आर्गनाइजेशन) 2013 के टीबी रिपोर्ट के मुताबिक वशि्व में 2.9 मिलियन केस ऐसे हैं, जो किसी कारणवश रजिस्टर्ड नहीं हो पाते। भारत में इसके 31 प्रतिशत केस लिस्ट नहीं हो पाते। कोट टीबी से घबराएं नहीं। डॉट्स(डायरेक्ट ऑब्जर्व ट्रीटमेंट सॉट कोर्स) इसके लिए सबसे कारगर है। सरकार 10 हजार से तीन लाख तक की नि:शुल्क दवा उप्लब्ध करा रही है।

यूजी सिन्हा, जिला टीबी अधिकारी।

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