DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

घोर अराजकता की चपेट में बांग्लादेश

बांग्लादेश दो बेगमों की लड़ाई के कारण तेजी से अराजकता की ओर बढ़ रहा है। ऐसा लगता है कि वहां गृहयुद्ध छिड़ ही जाएगा। शेख हसीना की पार्टी ‘अवामी लीग’ और बेगम खालिदा जिया की पार्टी ‘बीएनपी’, दोनों के समर्थक आए दिन बांग्लादेश के शहरों और गांवों में टकरा रहे हैं। शेख हसीना की पार्टी यानी अवामी लीग चाहती है कि आगामी पांच जनवरी को आम चुनाव संपन्न हो जाएं, क्योंकि जीत को लेकर वह और उनकी पार्टी आश्वस्त हैं। दूसरी ओर, बेगम खालिदा जिया हर हालत में इस चुनाव को रुकवाना चाहती हैं। उन्होंने पांच जनवरी को होने वाले चुनाव के बहिष्कार की घोषणा की है।

बांग्लादेश में सारा झगड़ा प्रधानमंत्री शेख हसीना द्वारा मार्च 2010 में ‘इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल’ की स्थापना से शुरू हुआ। शेख हसीना ने यह कोशिश की कि जिन लोगों ने 1971 में देश के स्वतंत्रता संग्राम का विरोध किया था और हजारों निर्दोष स्वतंत्रता सेनानियों की हत्या की थी, उन्हें सख्त सजा दी जाए। अब तक ट्रिब्यूनल ने 10 लोगों को फांसी की सजा दी है और एक दजर्न लोगों को आजीवन कारावास की। खालिदा जिया का कहना है कि जिन लोगों को फांसी की सजा सुनाई गई और जिन्हें आजीवन कारावास दिया गया, वे सभी उनकी पार्टी बीएनपी के नेता थे। वे किसी हत्या के अपराधी नहीं थे।
पिछले कई आम चुनावों के दौरान बांग्लादेश में यह प्रथा रही है कि चुनाव के ठीक पहले सरकार त्यागपत्र दे देती है और देश-विदेश के प्रतिष्ठित नागरिकों की देखरेख में आम चुनाव होते हैं। ऐसे लोग पूरी तरह गैर-राजनीतिक होते हैं। बेगम जिया का कहना है कि पुरानी परंपरा को कामय रखते हुए देश-विदेश के गैर-राजनीतिज्ञों की अंतरिम सरकार बनाकर देश में आम चुनाव कराए जाएं। पर शेख हसीना का कहना है कि वह किसी हालत में विदेशियों की देखरेख में आम चुनाव नहीं होने देंगी। शेख हसीना को संसद में दो-तिहाई बहुमत प्राप्त है, जिसने हाल में यह प्रस्ताव पास किया कि आम चुनाव सभी पार्टियों की मिली-जुली अंतरिम सरकार की देखरेख में होगा। बेगम जिया इसे मानने को तैयार नहीं थीं। उन्होंने कट्टरपंथियों की मदद से देश में आम हड़ताल शुरू कर दी। अभी तक 30 बार पूरे देश में हड़तालें हो चुकी हैं, जिनसे बांग्लादेश सरकार पूरी तरह पंगु हो गई है और इन हड़तालों के दौरान दोनों राजनीतिक पार्टियों के समर्थक सड़कों पर टकरा जाते हैं, जिसमें अनेक लोगों की जानें चली गई हैं। लगातार हड़ताल के कारण देश की अर्थव्यवस्था लगभग पूरी तरह चौपट हो चुकी है। बांग्लादेश की बिगड़ती राजनीतिक हालत को देखकर और वहां कट्टरपंथियों द्वारा आए दिन हड़ताल पर संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून ने वहां अपने प्रतिनिधि को भेजा, जिन्होंने दोनों नेताओं के बीच सुलह कराने का प्रयास किया। पर इसका कोई परिणाम नहीं निकला।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

 

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:घोर अराजकता की चपेट में बांग्लादेश