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भारत में हुए कुछ और पोंजी घोटाले

एमू घोटाला, तमिलनाडु
सुसी एमू फार्म्स ने 2006 में तमिलनाडु के इरोड जिले के एक छोटे से शहर में आस्ट्रेलियन पक्षी पालन की एक योजना शुरू की। इस स्कीम में निवेशकों से कहा गया कि शुरुआत में आप डेढ़ लाख रुपये लगाएं। दो साल में आपको कम से कम 1.44 लाख रुपये का मुनाफा जरूर मिलेगा। कंपनी ने बताया कि यह पैसा एमू (आस्ट्रेलियन) पक्षी का मांस, अंडा, चमड़ा और पंख बेच कर आएगा। यह तब कहा गया, जब इन चीजों का बाजार मूल्य कभी बहुत ज्यादा नहीं रहा। कंपनी ने शुरुआत में लोगों को जितना वायदा किया था, उतना वापस किया, जिससे दूसरे लोग भी निवेश करने को उत्साहित हुए। लेकिन 2012 में इसका भांडा फूटा, लेकिन तब तक कंपनी 500 करोड़ रुपये की ठगी कर चुकी थी।

श्रद्धा योजना, पश्चिम बंगाल
श्रद्धा ग्रुप चिटफंड की आड़ में एक सामूहिक निवेश योजना चला रहा था, जो 2013 अप्रैल में गायब हो गया। जब यह मामला प्रकाश में आया तो पता चला कि यह भी एक पोंजी स्कीम थी और कंपनी पुराने निवेशकों को नये निवेशकों के पैसे से उनकी रकम दे रही थी। हालांकि यह कितने का घोटाला है, इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा अभी मौजूद नहीं है, लेकिन सूत्रों के अनुसार इसमें तकरीबन 30,000 करोड़ रुपये का घपला हुआ है, जिससे लगभग 17 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। इस ग्रुप के चेयरमैन सुदीप्त सेन को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है और जांच जारी है।

गोल्ड सुख घोटाला, राजस्थान
गोल्ड सुख घोटाला नवंबर 2011 में प्रकाश में आया। जयपुर आधारित कंपनी द्वारा किये गए इस घोटाले में 200 करोड़ के घपले की बात कही जा रही है। इस कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर नरेंद्र सिंह और सीनियर एग्जीक्यूटिव पर यह आरोप है कि इन्होंने राजस्थान के लगभग दो लाख लोगों को अपनी पोंजी स्कीम के जरिये लूटा है। इन्होंने निवेशकों को बताया था कि उनका पैसा सोने में लगाया गया है और 18 महीने में वह उन्हें 150 फीसदी का मुनाफा देंगे। सिंह, उनकी पत्नी और कंपनी के पांच डायरेक्टर तथा कई एग्जीक्यूटिव्स को इस घोटाले में पकड़ा गया है। पुलिस कस्टडी में ही सिंह की मृत्यु हार्ट अटैक की वजह से हो गई। वैसे इस घोटाले की जांच जारी है।

 

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