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जिलानी बोले, शरीफ की शांति पहलों का लाभ उठाए भारत

जिलानी बोले, शरीफ की शांति पहलों का लाभ उठाए भारत

भारत के साथ रिश्ते सुधारने के लिए प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की वास्तविक दिलचस्पी का लाभ उठाने की सलाह देते हुए अमेरिका में पाकिस्तान के नए दूत जलील अब्बास जिलानी ने कहा है कि ऐसा न होने पर नई दिल्ली एक बड़ा अवसर गंवा देगी।

नई दिल्ली स्थित पाकिस्तान उच्चायोग में अपनी सेवाएं दे चुके जिलानी ने कहा कि भारत के साथ संबंध सुधारने में शरीफ की वास्तविक दिलचस्पी है। डॉन अखबार ने पूर्व विदेश सचिव जिलानी को यह कहते हुए उद्धत किया है ऐसा न करने पर वह (भारत) एक बड़ा अवसर गंवा देंगे।

अफगानिस्तान में जिलानी ने कहा कि युद्ध प्रभावित देश से अमेरिकी सैनिकों की पूर्ण वापसी वांछनीय नहीं है। उन्होंने कहा यहां तक कि अमेरिकी सैनिकों की वापसी की बातचीत शुरू होने से भी असर पड़ा। पहले की तुलना में पाकिस्तान में ज्यादा शरणार्थी आने लगे। इससे पता चलता है कि अफगानिस्तान के लोगों के मन में भी डर है।

अमेरिका की योजना दिसंबर 2014 तक अफगानिस्तान से अपने ज्यादातर लड़ाकू सैनिकों को वापस बुलाने की है। हालांकि उसका इरादा अफगान सरकार की मदद के लिए अपनी छोटी फौज वहां रखने का है। पाकिस्तान-अमेरिका के रिश्ते इस साल संवेदनशील स्थिति में पहुंच जाएंगे। पाकिस्तानी सुरक्षा प्रतिष्ठान को आशंका है कि अमेरिकी सैनिकों की वापसी से उत्पन्न रिक्तता को भारत भरेगा।

पाकिस्तान दावा करता है कि भारत, बलूचिस्तान में हिंसा फैलाने के लिए अफगान भू-भाग का उपयोग कर रहा है। नई दिल्ली इस आरोप को सिरे से खारिज करती है। दूसरी ओर, भारत वर्ष 2014 के बाद अफगानिस्तान में पाकिस्तान की भूमिका, खास कर हक्कानी नेटवर्क जैसे उग्रवादी समूहों के साथ उसकी सेना के संबंधों को लेकर चिंतित है, क्योंकि उसका मानना है कि इससे इस्लामाबाद को कश्मीर में एक बार फिर जिहाद शुरू करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।

शनिवार को वॉशिंगटन पहुंचे जिलानी ने कहा कि उनकी पहली प्राथमिकता दुनिया की आर्थिक महाशक्ति के साथ व्यापार और आर्थिक रिश्ते मजबूत करने की है। उन्होंने कहा कि निश्चित तौर पर रक्षा और सुरक्षा संबंध समान रूप से महत्वपूर्ण हैं, लेकिन ऊर्जा क्षेत्र मुख्य है, जिसे आगे ले जाना है। जिलानी ने इस बात पर सहमति जताई कि दक्षिण एशिया में अमेरिका की भूमिका तय करने के लिए वर्ष 2014 निर्णायक होगा।

उन्होंने कहा कि अगर ज्यादातर सैनिक बुला लिए जाते हैं तो हमारे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी रहेगी। सुरक्षा की जिम्मेदारी जो पहले दूसरों पर रही, वह पाकिस्तान की जिम्मेदारी बन जाएगी। इसमें दो मत नहीं हैं कि यह बड़ी चुनौती होगी। उन्होंने कहा कि हाल ही में, एक अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट में अनुमान जताया गया था कि अगर नाटो बलों की वापसी होती है तो तालिबान फिर अपना प्रभाव बढ़ाएगा।

जिलानी ने कहा कि हमारा आकलन है कि वह अहम भूमिका निभाते रहेंगे और इसीलिए पाकिस्तान को लगता है कि अफगानिस्तान में स्थिरता के लिए सुलह सहमति की प्रक्रिया महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि तालिबान, अफगान सरकार और अन्य गुटों के बीच सुलह सहमति भी बहुत महत्वपूर्ण है।

 

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