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आपका हम कदम

आपका हम कदम

जीवन में सफलता की चाह सबको होती है, लेकिन सफलता सही वक्त और अपनी शर्तो पर मिले, यह जरूरी नहीं। वहीं अगर सफलता देर से मिलती है तो यह सच भी अपने आप में सुखद होने के बावजूद खासा हताश करने वाला होता है। तो आखिर सफलता प्राप्ति का तरीका क्या है। सबसे पहले तो यह तथ्य आत्मसात करना जरूरी है कि सफलता की अवधारणा प्रत्येक व्यक्ति की अपनी-अपनी प्राथमिकताओं के आधार पर तय होती है।

कुछ के लिए सफलता एक निश्चित मंजिल तय करने तक सीमित होती है, जबकि अन्य के लिए सफलता ‘चांद-सितारों’ से पार की कोई वस्तु होती है। लिहाजा, सफलता की कोई निश्चित परिभाषा नहीं होती। प्रस्तुत पुस्तक अपने विषय के साथ एक बड़े सच की पैरवी भी करती है। वह यह कि आप अपने जीवन को जैसे चाहे जिएं, अपनी महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति करें, लेकिन उनके चलते अपने अंदर अनुशासन से जुड़े कुछ निश्चित मानदंडों को जरूर पुख्ता करें। पुस्तक की एक और खास बात यह है कि इसमें कथित दुनियावी सफलता से जुड़ी लोकप्रिय कथाओं या सूक्तियों का सहारा नहीं लिया गया है।

कई स्थानों पर पाठक को दुनिया के दूर-दराज में घटित कुछ लोगों की असफलताओं से जुड़े किस्से भी पढ़ने को मिलेंगे, जिन्हें लेखक ने बतौर चेतावनी पुस्तक में पिरोया है। इन कहानियों के जरिए वह उससे जुड़े कुछ संभावित तथ्यों को सामने रखता है और बताता है कि जो हुआ, उससे इतर कुछ साधारण प्रयासों से सत्य का कुछ और रूप भी हो सकता था। पुस्तक में मूलत: नौ अध्याय हैं, जो मानसिक तैयारी को इंगित करते हैं।

पहला अध्याय सकारात्मक बदलाव की तैयारी, दूसरा अपने लिए जरूरी रफ्तार तय करना, तीसरा खुद पर काबू, चौथा परमानंद की तैयारी, पांचवां बहाव को रोकना, छठा र्दुव्यसनों पर काबू, सातवां आत्म-उपचार की तैयारी, आठ बड़ी सफलता और नौवां कभी हथियार न डालने का जज्बा।

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