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विषय में जरूरी है व्यावहारिकता

विषय में जरूरी है व्यावहारिकता

जीव विज्ञान यानी बायोलॉजी की परीक्षाओं में जरूरत विषय की मूलभूत चित्रत्मक समझ के अनुसार उत्तर देने की होती है। यहां जानिए कि विषय को कैसे समझों और समझाएं।

योलॉजी एक बेहद रोचक विषय है। मेडिकल के छात्रों के लिए यह विषय खास महत्व रखता है। यह रटने का नहीं, बल्कि समझने का विषय है। इसकी खास बात यह है कि बायोलॉजी के कुछ प्रश्नों के उत्तर कौशल एवं विवेचन के आधार पर दिए जाते हैं, जिसके लिए विषय की जानकारी बेहद जरूरी है। इस विषय में डायग्राम्स की खास भूमिका होती है। डायग्राम्स आपकी खास प्रेजेंटेशन को दर्शाते हैं।

हॉट्स क्वेश्चन
बायोलॉजी में पांच यूनिट्स हैं, जिसमें प्रजनन जेनेटिक्स एवं एवोल्यूशन तथा बायोटेक्नोलॉजी यूनिट्स खास महत्व रखती हैं। इन यूनिट्स में से ही हॉट्स व सबसे अधिक अंक वाले प्रश्न पूछे जाते हैं। ये दोनों यूनिट्स मुश्किल जरूर हैं, लेकिन स्कोरिंग भी हैं। छात्र इन दोनों यूनिट्स को बखूबी समझों और इनके प्रश्नों के उत्तर बार-बार लिख कर देखें। बायोलॉजी में ह्यूमन वेलफेयर, इकोलॉजी एवं एन्वायर्नमेंट आदि कुछ यूनिट्स आसान हैं। इन यूनिट्स में पॉइंट वाइज उत्तर दें। डिफरेंसेज वाले प्रश्नों में टेबल बनाकर उत्तर दें और पूरे अंक प्राप्त करें।

टाइम मैनेजमेंट
योजनाबद्ध तरीके से तैयारी की जाए तो डिस्टिंक्शन आना लाजमी है। उत्तर देते समय टाइम मैनेजमेंट का खास ख्याल रखें, क्योंकि इसके बिना सभी प्रश्नों का उत्तर देना नामुमकिन है। छात्र कोशिश करें कि कम अंक वाले लघु प्रश्न पहले करें, ऐसा करने से मनोवैज्ञानिक लाभ मिलता है और ज्यादा प्रश्न कम समय में हो जाते हैं।

क्वेश्चन का तालमेल
जीव विज्ञान के प्रश्न-पत्र में अधिकांश बड़े प्रश्न यूनिट 1, 2, व 4 से पूछे जाते हैं। पहली यूनिट में नर तथा मादा, दूसरी तथा चौथी यूनिट में मनुष्य के जनन तंत्र, मासिक चक्र, हॉर्मोन्स का कार्य, गैमिटोजेनेसिप्स, फर्टिलाइजेशन तथा भ्रूण विकास, बर्थ कंट्रोल, पुष्प के विभिन्न भाग, परागकणों का बनना, ओव्यूल एवं एम्ब्रियोसैक की संरचना, पूर्ण विकसित एम्ब्रियोसैक परागकण व उसके बाद एन्डोस्पर्म तथा भ्रूण का बनना आदि विषयों पर प्रश्न पूछे जाते हैं।

यूनिट-3 से प्लान्ट ब्रीडिंग और उसके स्टैप्स पर आधारित 5 अंकों के प्रश्न अधिकतर मोनो हाईब्रीड क्रॉस डाई हाईब्रीड क्रॉस, इन्कंप्लीट डोमिनैन्स, कोडोमीमैन्स, डीएनए की संरचना, आनुवंशिक पदार्थ की खोज के लिए हश्रे व चेस प्रयोग, डीएनए रैप्लीकेशन ट्रांसक्रिप्शन, ट्रांसलेशन, डीएनए फिंगर प्रिंटिंग मुख्य टॉपिक्स हैं। यूनिट 5 में परितंत्र की संरचना तथा क्रियाविधि ऊर्जा प्रवाह, कार्बन चक्र तथा फॉस्फोरस चक्र महत्वपूर्ण विषय हैं।

प्रैक्टिकल परीक्षा की तैयारी
थ्योरी परीक्षा की तरह प्रैक्टिकल परीक्षा की तैयारी भी बहुत महत्वपूर्ण है। इसके स्पेसिमेंस की पहचान व उनके दो-दो विशिष्ट लक्षणों को ठीक से याद करें व लिखें। प्रैक्टिकल की तैयारी अभ्यास तथा प्री-बोर्ड परीक्षा के दौरान ठीक से करें तथा उनमें लिखे जाने वाले आंकड़े सारणीबद्ध तरीके से लिखें। आपकी प्रैक्टिकल रिकार्ड कॉपी साफ-सुथरी हो। इन्डेक्स और पूरा ‘प्रोजेक्ट वर्क’ टीचर्स के निर्देशानुसार करें।

वाइवा की तैयारी
प्रैक्टिकल एग्जाम में सबसे मुख्य बात ‘वाइवा’ की तैयारी है। यदि आप सभी प्रैक्टिकल तथा प्रोजेक्ट वर्क से संबंधित जानकारी की अच्छी तैयारी करते हैं तो फुल मार्क्स अजिर्त कर सकते हैं।

इन बिन्दुओं पर विशेष ध्यान दें :
* प्राकृतिक उपलब्ध वस्तुओं को प्रकृति से लेकर अध्ययन करें तो उसे आसानी से समझा जा सकता है।
* बायोलॉजी में चैप्टर्स को समझों, सेलेक्टिव स्टडी न करें।
* जरूरत पड़ने पर रेफरेंस बुक का इस्तेमाल करें अन्यथा एनसीईआरटी की टैस्क्ट बुक से ही तैयारी करें।
* एक अंक वाले प्रश्नों के लिए सभी यूनिट्स में बोल्ड शब्दों पर ध्यान दें।
* आकृतियां साफ बनाएं। आंसर शीट में कटिंग न करें।

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