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पोस्टकार्ड ने लगा दिया जैकपॉट

पोस्टकार्ड ने लगा दिया जैकपॉट

दुनिया भर के इतने स्टूडेंट्स से पार पाना आसान नहीं था, लेकिन आईआईटी, दिल्ली के स्टूडेंट उत्तम कुमार ने इसे कर दिखाया। कम्पिटिशन का नाम था विन योर फ्यूचर अनलिमिटेड कम्पिटिशन। अब अवॉर्ड के तौर पर उत्तम को एक साल के लिए ऑस्ट्रेलिया की सबसे बेहतर न्यू साउथ वेल्स यूनिवर्सिटी में पढ़ने का मौका मिलेगा, वो भी बिलकुल मुफ्त। इसके साथ रहने का खर्च, आने जाने का खर्च, महीने में एक फिक्स स्टाइपेंड और कोर्स के खत्म होने के बाद उसे एक एक्सक्लूसिव इंटर्नशिप करने का मौका भी मिलेगा।

फाइनल ईयर के स्टूडेंट उत्तम कुमार ने तय किया है कि वो इस यूनिवर्सिटी मेटीरियल्स साइंस से मास्टर डिग्री करेंगे। दिलचस्प बात ये है कि इस कम्पिटिशन का लकी मास्कट एक पोस्टकार्ड था। हर एप्लीकेंट को अपनी जिंदगी के ड्रीम्स को एक पोस्टकार्ड पर ड्रॉ करना था। उत्तम ने एनवायरनमेंट्स सस्टेनबिलिटी के लिए जरूरी स्टेप्स को इस पोस्टकार्ड में ड्रॉ किया और खुल गई उत्तम की किस्मत।

पीएम के नाम पर
कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के सेंट जॉन्स कॉलेज से डॉ. मनमोहन सिंह पढ़े हुए हैं। सेंट जॉन्स कॉलेज डॉ.मनमोहन सिंह के सम्मान में डॉ. मनमोहन सिंह स्कॉलरशिप्स की शुरुआत कर चुका है। इस स्कॉलरशिप के जरिए इंडियन स्टूडेंट्स सेंट जॉन्स कॉलेज से साइंस एंड टेक्नोलॉजी, इकोनॉमिक्स और सोशल साइंसेज से पीएचडी कर सकते हैं। एयरोस्पेस इंजीनियरिंग और एनर्जी स्टडीज भी इसमें शामिल हैं।

सेलेक्शन के लिए ब्रिटिश काउंसिल में एप्लाई करने वाले स्टूडेंट्स को शॉर्ट लिस्ट किया जाएगा और दिल्ली में पर्सनल इंटरव्यू के जरिए उनका फाइनल सेलेक्शन हो जायेगा। एप्लाई करने वाले को भारतीय नागरिक होना चाहिए, जो इस वक्त देश में रहते हों और उनके पास इंडियन पासपोर्ट भी हो। उम्र 15 जनवरी, 2014 को 35 वर्ष तक होनी चाहिए। आवेदक को इससे पहले ब्रिटिश सरकार से पढ़ाई के लिए फंडिंग न मिली हो, न ही यूके में अभी तक पढ़ाई की हो। एप्लाई करने की लास्ट डेट 15 जनवरी 2014 है।

आईआईएम के दो मिशन
इंदौर आईआईएम के स्टूडेंट्स आजकल दो मिशंस पर हैं। एक ग्रुप ने तो जागृति नाम की संस्था के बैनर तले रूरल स्कूल्स के बच्चों से मिलना शुरू किया है। ये लोग वहां जाकर स्कूलों में वॉटर फिल्टर लगाते हैं, स्पोर्ट्स किट देते हैं, साइंटिफिक इंस्ट्रुमेंट्स देते हैं, करियर काउंसलिंग करते हैं, ट्रेनिंग क्लासेज लेते हैं, बच्चों को स्कूल बैग्स गिफ्ट करते हैं, शहरी स्कूलों से उनके बीच की दूरी कम करने की कोशिश करते हैं, इसलिए टेक्नोलॉजी की प्राइमरी ट्रेनिंग भी देते हैं। एक दूसरा ग्रुप भी है, जो इंदौर की अस्त-व्यस्त ट्रैफिक व्यवस्था की वजहों को जानने में जुटा है।

यह ग्रुप बाकायदा एक सर्वे कर रहा है, शहर के हर चौराहों का नक्शा तैयार कर रहा है। हर चौराहे पर लोगों से ट्रैफिक जाम लगने की वजह जानने की कोशिश कर रहा है, उनके उपाय भी उन्हीं से पूछ रहा है। वो हर चौराहे का एक एक्शन प्लान बनाने के मूड में हैं। यह ग्रुप लोगों की आदतों को समझने की कोशिश कर रहा कि वो कितना ट्रैफिक नियमों को जानते हैं और कितना फॉलो करते हैं। इंदौर शहर को लोगों को इंदौर आईआईएम के इन दोनों ही स्टूडेंट्स ग्रुप से काफी फायदा होना वाला है।

डीयू की ‘दुविधा’
दिल्ली यूनीवर्सिटी ने अपना क्रिएटिव राइटिंग ई जनरल लॉन्च कर दिया है। दिलचस्प है इसका नाम, क्योंकि सारी क्रिएटिविटी इसके टाइटल में ही दिखा दी गई है। नाम रखा गया है ‘डीयू विधा’ (यहां ‘डीयू’अंग्रेजी के एल्फाबेट्स में और ‘विधा’ हिंदी में लिखा है) और इसे दूसरे तरीके से अंग्रेजी के शब्दों में एक साथ लिखेंगे तो ये होगा ‘दुविधा’। फिलहाल तो इस जनरल के होमपेज पर दोनों ही नाम दे दिए गए हैं। पहले एडीशन के लिए 500 स्टूडेंट्स ने अपने लेख भेजे थे, जिसमें से 32 को मौका मिला है। साल में दो बार आने वाले इस साहित्यिक जनरल का एडीटर प्रोफेसर हरीश त्रिवेदी को बनाया गया है, उनके साथ एडिटोरियल बोर्ड में डॉ.  सुनीता कुमार और रुचि कौशिक भी रहेंगे, जबकि स्टूडेंट एडिटर पारोनिता पत्रनोविश हैं।

हमें टीवी दे दो!
मुंबई विश्वविद्यालय के कलीना कैम्पस में सावित्री बाई फुले हॉस्टल की लड़कियां इन दिनों काफी परेशान हैं। एक ही रिक्वेस्ट को हर रोज 6 महीने से भेज रही हैं, हमारा टीवी रिप्लेस करवा दो, हमारा टीवी रिप्लेस करवा दो। लेकिन अभी तक किसी ने उनकी गुहार नहीं सुनी है। लड़कियों का कहना है कि 6 महीने से टीवी बेकार पड़ा है और हॉस्टल में आने के बाद बाहरी दुनिया में क्या चल रहा है, यह जानने का उनके पास कोई जरिया नहीं है। उनका कहना है कि वो हॉस्टल में आने के बाद दुनिया से एक दम कट जाती हैं। इतना भी पता नहीं होता कि देश में किस मुद्दे पर डिबेट चल रही है।

केवल टीवी की ही बात नहीं है, महीनों से उनका फ्रिज खराब है, तीन में दो वाटर कूलर खराब हैं, लेकिन उनको सबसे बड़ी परेशानी टीवी को लेकर है। कई बार अधिकारियों ने उनसे वादा तो किया, लेकिन हॉस्टल में टीवी आज तक रिप्लेस नहीं हो पाया। खास बात यह भी है कि हॉस्टल की ज्यादातर लड़कियां गरीब या लोअर मिडिल क्लास से हैं, सो खुद मिलकर टीवी खरीदने की भी पोजीशन में नहीं हैं। उनकी फरियाद जल्दी सुनी जाए, दुआ कीजिए।

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