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कठौता झील बुझाएगी प्यास

ठौता झील लोगों के लिए वरदान बनेगी। इसकाोीर्णोद्धार होगा। झील एक बार फिर से शहर वासियों की प्यास बुझाएगी। शारदा नहर से झील में पीने का पानी भराोाएगा। झील कोोलाशय के रूप में विकसित करने की तैयारी चल रही है। नई मुहिम से एक तो पीने का पानी मिलेगा दूसर इसका प्राकृतिक स्वरूप फिर से लौटेगा। हालाँकि झील के आस-पास बहुमािंला इमारतें खड़ी हो गईं हैं फिर भी पर्यावरणविद् सरकार के इस कदम से उत्साहित है।ड्ढr गोमती के बाद ताल-तलैया केोीर्णोद्धार की संभावनाओं पर मंथन हो रहा है। उस कड़ी में कठौता झील कोोल निगम के हवाले कर दिया गया है। अभी तक यह मत्स्य विभाग के पास थी। झील को शारदा कैनाल सेोोड़कर तीसर वाटर वक्र्स को पानी देने की योना है। यहोलाशय हमेशा भरा रहे इसके लिए सिंचाई विभाग वोल निगम के अधिकारियों कीोवाबदेही तय की गई है।ोल निगम के एक अधिशाषी अभियंता का कहना है कि तीसर वाटर वक्र्स को शारदा कैनाल से आपूर्ति कीोाती थी पर कैनाल बंदी के समय पानी की समस्या उठ खड़ी होती है। इसकी समस्या से निपटने के लिए ही झील को विकसित करने की योना बनी। शनिवार को मण्डलायुक्त ने इसेोल निगम को सौंप दिया। विशेषज्ञों के मुताबिक चिनहट स्थित इस झील में पानी के प्राकृतिक सोते अभी हैं। इसमें तीन फुट गहराई पर ही पानी मिलोाता है। पानी भरने से यह सोते एक बार फिर से सक्रिय हो सकते हैंोिसकी वाह से झील पुनर्ाीवित हो सकते हैं। पर्यावरणविद् डॉ. वीकेोोशी के मुताबिक झील में हमेशा पानी रहने से उस क्षेत्र के भू-ाल स्तर में भी बढ़ोत्तरी होगी। झील के सोते पुनर्ाीवित हो सकते हैं। यह देखनाोरूरी है कि झील में कोई नाला तो नहीं मिल रहा। अगर झील के चारों ओर अतिक्रमण है तो उसे साफ करायाोानाोरूरी है।ोीर्णोद्धार में यह सभी बातें शामिल होनी चाहिए। डॉ.ोोशी का कहना है कि शहर में मौाूद सभी झीलों को पुनर्ाीवित कियाोा सकता है।ोिस तरह आा कठौता कीोरूरत महसूस कीोाने लगी है वैसे भविष्य में बाकी झील भी काम आएँगी।

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