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आशंका तो थी पर इतनी बड़ी नहीं

आशंका तो पहले से ही थी कि चुनाव के पहले नक्सली बड़ी वारदात को अंजाम देंगे लेकिन किसी ने भी यह नहीं सोचा था कि उनकी हिम्मत इतनी बढ़ जाएगी कि वे बीएसएफ के कैंप पर हमला कर देंगे। बीएसएफ के कैंपों पर हमले का साहस आतंकवादी समूह भी जल्दी नहीं करते हैं। केन्द्रीय खुफिया एजेंसी के एक अधिकारी ने बताया कि चुनाव के पहले जिस तरह उन्होंने बहिष्कार का घोषणापत्र जारी किया था उससे आशंका तो बन ही गई थी और इस आशंका से सरकार को अवगत भी करा दिया गया था लेकिन सैन्य बल के कैम्प पर नक्सली हमले के बार में सोचना भी मुश्किल था।ड्ढr ड्ढr इससे पहले काराकाट के जद यू उम्मीदवार महाबली सिंह का प्रचार वाहन फूंककर और जहानाबाद में एक उम्मीदवार रामाश्रय सिंह के घर पर हमला कर नक्सलियों ने जता दिया है कि इस चुनाव में उनकी कड़ी चुनौती झेलनी होगी। दरअसल जिस रोहतास में बीएसफ के कैंप पर यह हमला हुआ है उसे नक्सलियों के रड कॉरिडोर का एक बड़ा गढ़ माना जाता है। खुफिया एजेंसियों का तो यहां तक कहना है कि रोहतास के कैमूर के रास्ते नक्सली मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के अलावा आंध्र प्रदेश तक का सफर तय कर लेते हैं। इस रास्ते को भी रड कॉरिडोर का अंग कहा जाता है और इससे होकर हथियारों की आवाजाही ज्यादा आसानी से हो पाती है। खासकर पीपुल्स वार और एमसीसी जसे संगठनों के एक होने के बाद इस इलाके में नक्सलियों की ताकत काफी बढ़ गई है। कैमूर की पहाड़ियों पर नक्सलियों के प्रशिक्षण कैम्प चलने की खबरं आम तौर पर राजधानी पहुंचती रही है और पुलिस के भी आला अधिकारी इससे इनकार नहीं करते हैं।ड्ढr ड्ढr पिछले वर्ष रोहतास पुलिस ने कैमूर की पहाड़ियों पर चलने वाले एक प्रशिक्षण शिविर को ध्वस्त किया था। चुनाव की शुरूआत में ही नक्सलियों ने अपने चुनाव बहिष्कार का घोषणापत्र जारी कर दिया था। नक्सली आन्दोलन के इतिहास में यह पहला मौका था जब किसी संगठन ने बहिष्कार के लिए अपना घोषणा पत्र जारी किया था। भाकपा माओवादी की उत्तरी व पूर्वी रिानल ब्यूरो की ओर से जारी इस घोषणापत्र में घोषणा पत्र में लोगों का आह्वान किया गया है कि इस तरह के देश का निर्माण करने के लिए वे संसद से लेकर पंचायतों तक के चुनावों का बहिष्कार करं। माओवादियों ने बताने की कोशिश की है कि वे किस तरह का देश बनाना चाहते हैं। पिछले 60 वर्षो में इस देश के लोगों ने केन्द्र और प्रांतों की सरकारों को बदला लेकिन हालत नहीं बदली। उनकी पार्टी व्यवस्था को बदलने के लिए संघर्ष कर रही है। उन्होंने दावा किया है कि वे आतंकवादी कार्रवाई के खिलाफ हैं जिनमें बेकसूरों की हत्या की जाती है। वे शोषितों को गोलबंद करके ही व्यवस्था में परिवर्तन लाना चाहते हैं। इस परिवर्तन के बाद वे एक नया संविधान बनायेंगे।ं

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