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1578 सीटें रिक्त रहने का अंदेशा

लंबे समय से अधर में लटकी उर्दू शिक्षकों की बहाली के लिए मानव संसाधन विभाग ने 22 जिलों में रिक्त 4401 पदों की अधियाचना जेपीएससी से कर दी है। इन पदों पर बहाली झारखंड प्रारंभिक विद्यालय नियुक्ित नियमावली में निहित प्रावधानों के तहत आरक्षण की सुविधा विभिन्न वर्गो को दी गयी है। इसमें 2206 अनारक्षित, 504 अनुसूचित जाति, 1074 अनुसूचित जनजाति और 617 अत्यंत पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित है। यह सत्य है कि उर्दू एक भारतीय भाषा है और स्वतंत्रता के बाद यह भाषा मुख्यत: मुसलमानों तक ही कें द्रित है। पूर देश में अनुसूचित जाति के लिए 0.8 प्रतिशत तथा अनुसूचित जनजाति के लिए 0.5 प्रतिशत ही मुसलमानों को आरक्षण का लाभ मिलता है (सच्चर रिपोर्ट)। झारखंड में मुसलमानों के लिए अनुसूचित जाति एवं जनजाति के आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है।ड्ढr प्रश्न यह उठता है कि 504 अनुसूचित जाति एवं 1074 अनुसूचित जनजाति अर्थात् 1578 पद जो कुल 4401 सीटों का 36 प्रतिशत (लगभग) होता है, इसके लिए उम्मीदवार कहां से आयेंगे। उर्दू शिक्षकों की बहाली के लिए उठाये गये कदम के लिए सीएम मधु कोड़ा एवं मानव संसाधन मंत्री बंधु तिर्की बधाई के पात्र हैं। परंतु राज्य सरकार को चाहिए कि 1578 सीटें रिक्त न रहे, इसके लिए इन सीटों को अनारक्षित एवं अत्यंत पिछड़ा वर्गो में शामिल कर लें। साथ ही उर्दू शिक्षकों की बहाली में मुसलिम महिलाओं को विशेष लाभ दें।ं

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