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5500 करोड़ अफसरों की जेब में

झारखंड के 5500 करोड़ रुपये अफसरों की जेब में हैं। यह रकम मार्च लूट के दौरान एडवांस के रूप में सरकारी खजाने से बीते छह सालों में निकाली गयी है। पूर्व वित्त मंत्री रघुवर दास, वर्तमान वित्त मंत्री स्टीफन मरांडी के बाद सीएम मधु कोड़ा भी यह रकम अफसरों की जेब से नहीं निकलवा पा रहे हैं।ड्ढr एडवांस रकम अपने खाते में रख अधिकारी करोड़ों रुपये सूद कमा रहे हैं। गौरतलब है कि एडवांस के लापता 5500 करोड़ राज्य के औसत सालाना योजना बजट से कुछ ही कम हैं। सीएम ने विकास आयुक्त को 30 मई तक हर हाल में सभी जिलों से एडवांस का हिसाब लेने और नहीं देनेवालों पर कार्रवाई का आदेश दिया था। पश्चिमी सिंहभूम में मामला पकड़े जाने के बाद राज्य के मात्र तीन जिलों-साहेबगंज, लातेहार और धनबाद ने एडवांस का हिसाब दिया। लेकिन बाकी जिलों में सीएम के आदेश का कोई असर नहीं हुआ है। पिछले चार वर्षो में महालेखाकार ने इसे वित्तीय अनियमितता बता कर सरकार को कई बार अलर्ट किया, पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। वित्त सचिव पद पर रहते हुए राजबाला वर्मा ने भी कहा था कि एडवांस की रकम के मामले में गबन से इनकार नहीं किया जा सकता।ड्ढr 5500 करोड़ रुपये पर अगर बैंक में एफडी हो तो सालाना सूद कम से कम पांच सौ करोड़ रुपये बनता है। एडवांस की इस रकम का बड़ा हिस्सा अधिकारियों ने बैंकों में जमा कर रखा है। अगर अधिकारी एडवांस का हिसाब देते हैं, तो उन्हें सूद से हुई आमदनी का हिसाब भी देना पड़ेगा। कुछ जिलों के डीसी द्वारा बैंक स्टेटमेंट मांगे जाने से अफसर हिसाब देने से बच रहे हैं।ं

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