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जागरूकता से घटेगी प्रसव मौत की दर

प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा की मौत की दर घटाने के लिए सबसे जरूरी है कि लोगों को जागरूक किया जाये। इसमें चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों के साथ-साथ स्वयंसेवी संस्थाओं की अहम भूमिका होगी। ये बातें 30 जून को होटल अशोका में सीसीएफ व सिनी की ओर से संस्थागत प्रसव पर आयोजित स्टेट लेवल एडवोकेसी वर्कशॉप में सामने आयीं। इस मौके पर बतौर मुख्य अतिथि स्वास्थ्य मंत्री भानू प्रताप शाही ने दावा किया राज्य में मृत्यु और शिशु जन्म-मृत्यु दर में कमी आयी है। संस्थागत प्रसव की संख्या में काफी वृद्धि हुई है। मंत्री ने चेतावनी दी कि संस्थागत प्रसव नहीं होने पर चिकित्सक और स्वास्थ अधिकारी नपेंगे।ड्ढr विशिष्ट अतिथि और समाज कल्याण मंत्री जोबा मांझी ने कहा कि ग्रामीण महिलाओं को जागरूक करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सरकार और सीसीएफ मिलकर साथ काम करें तो ग्रामीणों को अच्छे ढंग से जागरूक किया जा सकता है। सीसीएफ के संजीव झा ने स्वागत किया। संचालन तन्वी झा ने किया। सीसीएफ के वित्त निदेशक हेमंत कुमार ने संस्थान की गतिविधियों की जानकारी दी। कार्यशाला के तकनीकी सत्र में दक्षिणी छोटानागपुर की कमिश्नर निधि खरे ने एएनएम को बेहतर ढंग से प्रशिक्षित करने पर बल दिया है। सीसीएफ के जोनल मैनेजर बार्थो बासुमतारी ने अतिथियों का स्वागत किया। तकनीकी सत्र में डॉ डीपी तनेजा सहित कई अन्य डॉक्टर और एनजीओ के प्रतिनिधियों ने अपने विचार व्यक्त किये। सिनी के डॉ सुरांन प्रसाद ने सुरक्षित मातृत्व पर प्रकाश डाला। सुबीर कुमार ने झारखंड में स्वास्थ व्यवस्था की विस्तृत जानकारी दी।

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