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काम को बाधित कर रही अफसरशाही: नीतीश

अफसरशाही नगर निकायों के कामकाज को बाधित कर रही है। इससे सत्ता का विकेन्द्रीकरण करने का संवैधानिक उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा है। सोमवार को 1, अणे मार्ग में जुटे नगर निकायों के प्रतिनिधियों ने अपनी-अपनी ‘राई’ जैसी पीड़ा को जमाकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आगे समस्याओं का पहाड़ खड़ा कर दिया। चमचमाती लग्जरी गाड़ियों में आए निकाय प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पीएचईडी मंत्री अश्वनी कुमार चौबे के भाषण के दौरान हो-हल्ला तो मचाया ही, माईक के लिए आपस में भी झपटमारी की। जिन 84 प्रतिनिधियों को बोलने का मौका मिला, उन सबों ने भी जनता के मुद्दे कम ही उठाये। अधिकतर का ध्यान अपने लिए मानदेय-भत्ता, कम्प्यूटर और एमपी-एमएलए के समान विकास राशि हासिल करने पर ही लगा था।ड्ढr ड्ढr भागलपुर के प्रतिनिधियों ने अधिकारियों पर अपमानजनक व्यवहार करने का आरोप लगाया। आरा नगर निगम के मेयर लक्ष्मण चौरसिया का कहना था कि अफसर काम होने के बाद बोर्ड को जानकारी देते हैं। पटना नगर निगम वार्ड-4 की आभा सिंह ने कहा कि अधिकारी 25 लाख रुपये तक का काम करा लेते हैं जबकि पार्षद पांच हजार का कैचपिट भी नहीं बनवा पाते। सासाराम के उप मेयर सुरन्द्र पान ने कहा कि अधिकारी सशक्त स्थायी समिति की बात नहीं मानते। चकिया नगर परिषद के अध्यक्ष शत्रुघ्न प्रसाद गुप्ता और मधेपुरा के मुख्य पार्षद ने कहा कि निकाय क्षेत्र में काम कराने के लिए पार्षदों को विशेष कोष दिया जाना चाहिए। बेतिया के नगर पार्षद अभिषेक पाण्डेय और फुलवारीशरीफ, वार्ड 22 के सदस्य ने 100 रुपये मानदेय को अपमान राशि करार दिया। बिहार शरीफ के महापौर दिनेश कुमार ने निगम में इंजीनियरिंग सेल बनाने, बेगूसराय के मुख्य उप पार्षद जवाहर लाल ने रलवे गुमटी पर उपरी पुल बनाने और बड़हिया के चुनचुन सिंह ने टाल क्षेत्र के विकास का डीपीआर बनाने की मांग की।

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